उत्तराखंड : भारी बारिश से 47 लोगों की मौत, चारधाम यात्रा मार्ग पर फंसे हुए तीर्थयात्रि

देहरादून:

उत्तराखंड के चंपावत, नैनीताल, उधम सिंह नगर, पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पौड़ी और चमोली में सोमवार सुबह 8.30 बजे से मंगलवार सुबह 8.30 बजे तक भारी बारिश हुई।

उत्तराखंड के बड़े हिस्से में पिछले 24 घंटों में अत्यधिक भारी बारिश के कारण कुमाऊं क्षेत्र में बाढ़, भूस्खलन और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। वहीं मुक्तेश्वर में पिछले 107 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। यहां 340.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है जबकि पिछला रिकॉर्ड  18 सितंबर, 1914 का था जब 254.5 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के अनुसार, जिन जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हुई, उनमें चंपावत, नैनीताल, उधम सिंह नगर, पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पौड़ी और चमोली शामिल हैं,।

ऐसी कई रिपोर्टे थीं कि लोगों ने बारिश को बादल फटना कहा। लेकिन आईएमडी केवल एक घंटे में 100 मिमी या उससे अधिक की बारिश को बादल फटना बताता है। उत्तराखंड में 24 घंटे की बारिश का पिछला रिकॉर्ड पंत नगर के पास था जब 10 जुलाई 1990 को 228 मिमी बारिश हुई थी, लेकिन अब यह रिकॉर्ड 403.2 मिमी बारिश से टूट गया है। आईएमडी देहरादून के आंकड़ों में कहा गया है कि वेधशाला में 25 मई, 1962 से रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।  इसी तरह मुक्तेश्वर में पिछला रिकॉर्ड 18 सितंबर, 1914 को 254.5 मिमी बारिश का था, जो 340.8 मिमी बारिश के वर्तमान रिकॉर्ड से टूट गया।

बारिश के कारण हुए हादसों में अभी तक 47 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य सरकार ने सभी मृतकों के परिवार को 4-4 लाख रुपये देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार की शाम को मुआवजे की घोषणा की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तराखंड में बारिश के कारण अब तक 47 लोगों की मौत हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, ‘मृतकों के परिवारों को 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। घर गंवाने वालों को 1.9 लाख रुपये दिए जाएंगे। जिन लोगों ने अपना पशुधन खो दिया है, उन्हें हर संभव मदद दी जाएगी।’

वहीं, इससे पहले दिन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री धन सिंह रावत और राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अशोक कुमार के साथ बारिश से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने सभी जिला मजिस्ट्रेट से किसानों को हुए नुकसान का आकलन करने और जल्द से जल्द उन्हें एक रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से न घबराने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि उन्हें (फंसे हुए लोगों को) सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने चारधाम यात्रियों से फिर अपील की कि वे जहां हैं, वहीं रुक जाएं और मौसम में सुधार होने से पहले अपनी यात्रा शुरू न करें। उन्होंने चमोली और रुद्र प्रयाग जिलों के जिला मजिस्ट्रेट से चारधाम यात्रा मार्ग पर फंसे हुए तीर्थयात्रियों की खासतौर से देखभाल करने का निर्देश दिया।

धामी ने कहा कि बारिश से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने माना कि लगातार बारिश से किसानों पर काफी असर पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थिति का जायजा लेने के लिए उनसे फोन पर बात की और उन्हें हरसंभव मदद देने का आश्वासन दिया।

एसईओसी ने बताया कि ‘चमोली जिले के जोशीमठ के समीप एक भूस्खलन के मलबे में तीन महिलाओं समेत चार मजदूर फंस गए। घटना में एक महिला मजदूर घायल हो गयी जबकि बाकी के लोग सुरक्षित हैं।’ वहीं, नैनीताल में मॉल रोड और नैनी झील के किनारे पर स्थित नैना देवी मंदिर में बाढ़ आ गयी है, जबकि भूस्खलनों के कारण एक हॉस्टल की इमारत को नुकसान पहुंचा है।

नैनीताल से प्राप्त एक रिपोर्ट के अनुसार, जिला प्रशासन शहर में फंसे पर्यटकों की मदद के लिए पुरजोर प्रयास कर रहा है। शहर में आने वाले और बाहर जाने वाले वाहनों में सवार यात्रियों को आगाह करने के लिए पुलिस को तैनात किया गया है तथा यात्रियों से बारिश बंद होने तक ठहरने को कहा जा रहा है।

भूस्खलनों से शहर से बाहर जाने का रास्ता अवरुद्ध हो गया है। रामनगर-रानीखेत मार्ग पर लेमन ट्री रिजॉर्ट में करीब 100 लोग फंस गए हैं और कोसी नदी का पानी रिजॉर्ट में घुस रहा है। नैनीताल जिले में बिजली, दूरसंचार और इंटरनेट संपर्क भी बुरी तरह बाधित है।

उत्तराखंड के हल्द्वानी में बारिश के बाद उफनती गौला नदी में फंसे एक हाथी को मंगलवार को रेस्क्यू किया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से राज्य में तेज बारिश जारी है। प्रदेश की कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। वीडियो को वन विभाग की टीम ने कन्फर्म किया है। DFO संदीप कुमार ने ANI को बताया कि हमें हाथी के नदी के बीचों-बीच फंसे होने की सूचना मिली थी। हमने रेस्क्यू टीम को मौके पर भेजकर किसी तरह उसे बचा लिया। हाथी को जंगल में छोड़ दिया गया है। वन विभाग की टीम उस पर नजर रख रही है।

चंपावत में 579 मिमी बारिश

आईएमडी ने कहा कि हिमालयी राज्य में अत्यधिक वर्षा मध्य और ऊपरी क्षोभमंडल स्तरों में ऊपरी वायु प्रणाली के रूप में पश्चिमी विक्षोभ का परिणाम है जो पूर्व-उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ रही है। चंपावत जिले में मुख्यालय चंपावत में 579 मिमी बारिश हुई, जबकि अन्य जगहों पर पंचेश्वर में 508 मिमी से टनकपुर में 123 मिमी बारिश हुई।

नैनीताल में 535 मिमी बारिश
नैनीताल में 535 मिमी, नैनीताल (ज्योलिकोट) में 490.0 मिमी, भीमताल में 402 मिमी, मुक्तेश्वर में 340.8 मिमी, हल्द्वानी में 325.4 मिमी और राम नगर में 227 मिमी बारिश हुई। उधम सिंह नगर जिले में रुद्रपुर में 484 मिमी, पंतनगर में 403.2 मिमी और काशीपुर में 176 मिमी बारिश हुई। पिथौरागढ़ जिले में, गनई गंगोली में 325 मिमी, थाल में 242.0 मिमी और पिथौरागढ़ शहर में 212.1 मिमी दर्ज किया गया।

अल्मोड़ा में 217 मिमी बारिश
आईएमडी के आंकड़ों से पता चलता है कि बागेश्वर जिले में, शमा में 308 मिमी, लिट्टी में 299 मिमी और डांगोली में 283 मिमी दर्ज किया। अल्मोड़ा जिले में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई। टकुला में 282 मिमी, अल्मोड़ा में 217 मिमी और रानीखेत में 165 मिमी दर्ज किया गया।

लैंसडाउन में 238 मिमी बारिश
पौड़ी जिले में भी लैंसडाउन में 238 मिमी, सतपुली में 218 मिमी, कोटद्वार में 138.0 मिमी और श्रीनगर में 128.4 मिमी के साथ अत्यधिक भारी वर्षा हुई। चमोली जिले में, जोशीमठ में 185.6 मिमी, पांडुकेश्वर में 182 मिमी, कर्णप्रयाग में 134.6 मिमी, चमोली में 101.2 मिमी और गैरसैंण में 116 मिमी बारिश दर्ज की गई।