जल जीवन मिशन के बारे में ग्राम पंचायतों तथा पानी समितियों से बातचीत के अवसर पर प्रधानमंत्री ने संबोधन में पानी का उपयोग हमें प्रसाद की तरह करना चहिए.

नई दिल्ली

केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी श्रीमान गजेंद्र सिंह शेखावत ,  प्रह्लाद सिंह पटेल , बिश्वेश्वर टुडु , राज्य के मुख्यमंत्री, राज्यों के मंत्रीगण, देश भर की पंचायतों से जुड़े सदस्य, पानी समिति से जुड़े सदस्य, और देश के कोने-कोने में वर्चुअली इस कार्यक्रम के साथ जुड़े हुए कोटि-कोटे मेरे भाइयों और बहनों।H20211002101988 300x221 1

आज 2 अक्टूबर का दिन है, देश के 2 महान सपूतों को हम बड़े गर्व के साथ याद करते हैं। पूज्य बापू और लाल बहादुर शास्त्री जी, इन दोनों महान व्यक्तित्वों के हृदय में भारत के गांव ही बसे थे। मुझे खुशी है कि आज के दिन देशभर के लाखों गांवों के लोग ‘ग्राम सभाओं’ के रूप में जल जीवन संवाद कर रहे हैं। ऐसे अभूतपूर्व और राष्ट्रव्यापी-मिशन को इसी उत्साह और ऊर्जा से सफल बनाया जा सकता है। जल जीवन मिशन का विजन, सिर्फ लोगों तक पानी पहुंचाने का ही नहीं है। ये Decentralisation का- विकेंद्रीकरण का उसका भी एक बहुत बड़ा Movement है। ये Village Driven- Women Driven Movement है। इसका मुख्य आधार, जन आंदोलन और जन भागीदारी है। और आज ये हम इस आयोजन में होते हुए देख रहे हैं।

जल जीवन मिशन को अधिक सशक्त, अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई और कदम भी उठाए गए हैं। जल जीवन मिशन ऐप पर इस अभियान से जुड़ी सभी जानकारियां एक ही जगह पर मिल पाएंगी। कितने घरों तक पानी पहुंचा, पानी की क्वालिटी कैसी है, वॉटर सप्लाई स्कीम का विवरण, सब कुछ इस ऐप पर मिलेगा। आपके गांव की जानकारी भी उस पर होगी। Water Quality Monitoring और Surveillance Framework से Water Quality को बनाए रखने में बहुत मदद मिलेगी। गाँव के लोग भी इसकी मदद से अपने यहाँ के पानी की शुद्धता पर बारीक नजर रख पाएंगे।

इस वर्ष पूज्य बापू की जन्मजयंति हम आज़ादी के अमृत महोत्सव के इस महत्‍वपूर्ण कालखंड में साथ-साथ मना रहे हैं। एक सुखद एहसास हम सभी को है कि बापू के सपनों को साकार करने के लिए देशवासियों ने निरंतर परिश्रम किया है, अपना सहयोग दिया है। आज देश के शहर और गांव, खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर चुके हैं। करीब-करीब 2 लाख गांवों ने अपने यहां कचरा प्रबंधन का काम शुरू कर दिया है। 40 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतों ने सिंगल यूज प्लास्टिक को बंद करने का भी फैसला लिया है। लंबे समय तक उपेक्षा की शिकार रही खादी, हैंडीक्राफ्ट की बिक्री अब कई गुना ज्यादा हो रही है। इन सभी प्रयासों के साथ ही, आज देश, आत्मनिर्भर भारत अभियान के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।

ग्राम पंचायतों को ज्यादा से ज्यादा अधिकार दिए जा रहे हैं

2014 में जब देश ने मुझे नया दायित्व दिया तो मुझे गुजरात में ग्राम स्वराज के अनुभवों का, राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने का अवसर मिला। ग्राम स्वराज का मतलब सिर्फ पंचायतों में चुनाव कराना, पंच-सरपंच चुनना, इतना ही नहीं होता है। ग्राम स्वराज का असली लाभ तभी मिलेगा जब गांव में रहने वालों की, गांव के विकास कार्यों से जुड़ी प्लानिंग और मैनेजमेंट तक में सक्रिय सहभागिता हो। इसी लक्ष्य के साथ सरकार द्वारा विशेषकर जल और स्वच्छता के लिए, सवा दो लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि सीधे ग्राम पंचायतों को दी गई है। एक तरफ जहां ग्राम पंचायतों को ज्यादा से ज्यादा अधिकार दिए जा रहे हैं, दूसरी तरफ पारदर्शिता का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। ग्राम स्वराज को लेकर केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का एक बड़ा प्रमाण जल जीवन मिशन और पानी समितियां भी है।

पानी का उपयोग हमें प्रसाद की तरह करना

पानी का उपयोग हमें प्रसाद की तरह करना चहिए। लेकिन कुछ लोग पानी को प्रसाद नहीं, बहुत ही सहज सुलभ मानकर उसे बर्बाद करते हैं। वो पानी का मूल्य ही नहीं समझते। पानी का मूल्य वो समझता है, जो पानी के अभाव में जीता है। वही जानता है, एक-एक बूंद पानी जुटाने में कितनी मेहनत करनी पड़ती है। मैं देश के हर उस नागरिक से कहूंगा जो पानी की प्रचुरता में रहते हैं, मेरा उनसे आग्रह है कि आपको पानी बचाने के ज्यादा प्रयास करने चाहिए। और निश्चित तौर पर इसके लिए लोगों को अपनी आदतें भी बदलनी ही होंगी। हमने देखा है, कई जगह नल से पानी गिरता रहता है, लोग परवाह नहीं करते। कई लोग तो मैंने ऐसे देखे हैं जो रात में नल खुला छोड़कर उसके नीचे बाल्टी उलट कर रख देते हैं। सुबह जब पानी आता है, बाल्टी पर गिरता है, तो उसकी आवाज उनके लिए मॉर्निंग अलार्म का काम करती है। वो ये भूल जाते हैं कि दुनिया भर में पानी की स्थिति कितनी अलार्मिंग होती जा रही है।

अक्सर ऐसे महानुभावों का जिक्र करता हूं, जिन्होंने जल संरक्षण, जल संचयन को अपने जीवन का सबसे बड़ा मिशन बनाया हुआ है। ऐसे लोगों से भी सीखा जाना चाहिए, प्रेरणा लेनी चाहिए। देश के अलग-अलग कोनों में अलग-अलग प्रोग्राम होते हैं, उसकी जानकारी हमें अपने गांव में काम आ सकती है। आज इस कार्यक्रम से जुड़ी देश भर की ग्राम पंचायतों से भी मेरा आग्रह है, गांव में पानी के स्रोतों की सुरक्षा और स्वच्छता के लिए जी-जान से काम करें। बारिश के पानी को बचाकर, घर में उपयोग से निकले पानी का खेती में इस्तेमाल करके, कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देकर ही हम अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं।

हमारे यहां कहा गया है-

  • उप-कर्तुम् यथा सु-अल्पम्, समर्थो न तथा महान् |
  • प्रायः कूपः तृषाम् हन्ति, सततम् न तु वारिधिः ||

यानि, पानी का एक छोटा सा कुआं, लोगों की प्यास बुझा सकता है जबकि इतना बड़ा समंदर ऐसा नहीं कर पाता है। ये बात कितनी सही है! कई बार हम देखते हैं कि किसी का छोटा सा प्रयास, बहुत से बड़े फैसलों से भी बड़ा होता है। आज पानी समिति पर भी यही बात लागू होती है। जल व्यवस्था की देखरेख और जल संरक्षण से जुड़े काम भले ही पानी समिति, अपने गांव के दायरे में करती है, लेकिन इसका विस्तार बहुत बड़ा है। ये पानी समितियां,गरीबों-दलितों-वंचितों-आदिवासियों के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव ला रही हैं।

जिन लोगों को आजादी के बाद, 7 दशकों तक नल से जल नहीं मिल पाया था, छोटे से नल ने उनकी दुनिया ही बदल दी है। और ये भी गर्व की बात है कि जल जीवन मिशन के तहत बन रही ‘पानी समितियों’ में 50 प्रतिशत सदस्य अनिवार्य रूप से महिलाएं ही होती हैं। ये देश की उपलब्धि है कि इतने कम समय में करीब साढ़े 3 लाख गांवों में ‘पानी समितियां’ बन चुकी हैं। अभी कुछ देर पहले हमने जल जीवन संवाद के दौरान भी देखा है कि इन पानी समितियां में गांव की महिलाएं कितनी कुशलता से काम कर रही हैं। मुझे खुशी है की गांव की महिलाओं को, अपने गांव के पानी की जांच के लिए विशेष तौर पर ट्रेनिंग भी दी जा रही है।