नई दिल्ली
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में आतंकी हमले के बाद अब दुनिया की निगाहें अमेरिका के अगले कदम पर लगी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने गुनाहगारों को सजा देने की बात कही है, इसलिए अमेरिका के अगले कदम पर सबकी निगाहें हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका आईएस के खिलाफ कार्रवाई तो करेगा लेकिन इस मामले में उसके पास भी सीमित विकल्प हैं। अमेरिकी सैनिकों के अफगानिस्तान भेजे जाने के आसार नहीं हैं।
रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह ने कहा कि अमेरिका ने जिस प्रकार से अफगानिस्तान से अपनी फौजें हटाईं, उससे इस प्रकार की घटनाएं होने का खतरा महसूस किया जा रहा था। दरअसल, अफगानिस्तान आतंकी संगठनों का गढ़ बना हुआ है। कभी आधे इराक पर काबिज होने वाला आईएस भी यहां सक्रिय है। भले ही वह अब सीमित हो चुका हो। उसने अफगानिस्तान में आत्मघाती हमले को अंजाम देकर अमेरिका और तालिबान दोनों को चुनौती दी है। अमेरिकी फौज को भी इस हमले का निशाना बनाया गया था। संभवत इसके जरिये यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह ताकतवर हो रहा है। दूसरे, तालिबान भी आईएस की मदद लेता रहा है इसलिए इस हमले के पीछे वह तालिबान को भी खबरदार कर रहा है।














