रायपुर। 72 वर्षीय कमल (परिवर्तित नाम) छत्तीसगढ़ के वह पहले मरीज हैं, जिन्होंने बिलासपुर के अपोलो हॉस्पिटल्स में कार्डियेक रिद्म मैनेजमेंट डिवाईस का प्रत्यारोपण कराया है। उन्हें दिल की असामान्य धड़कन पहले से ही महसूस हो रही थी, जिसे कार्डियेक एरिद्मिया कहते हैं। कमल को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, सीने में दर्द और दैनिक काम करने पर घबराहट महसूस होती थी। उनका डायग्नोसिस करने पर वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया की समस्या पाई गई, जिसके कारण उनके दिल की धड़कर तेज एवं अनियमित थी, साथ ही उनकी बाईं ओर की वेंट्रिकल (दिल के बाएं हिस्से के नीचे की ओर स्थित) क्षतिग्रस्त थी। उनकी स्थिति सम्हालने के लिए उनकी मिनिमली इन्वेसिव सर्जरी की गई और उनके शरीर में अत्याधुनिक टेक्नॉलॉजी वालला एबॉट्स इंप्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफाईब्रिलेटर (आईसीडी) लगाया गया। आईसीडी छाती के ऊपरी हिस्से में लगाई जाने वाली एक छोटी सी इलेक्ट्रॉनिक डिवाईस है, जो दिल की असामान्य धड़कन को मॉनिटर कर उसे सिंक्रोनाईज करती है। ब्लूटूथ टेक्नॉलॉजी युक्त सुरक्षित रिमोट मॉनिटरिंग फीचर द्वारा एबॉट् नैक्स्ट जनरेशन डिवाईस मरीज की ज्यादा संलग्नता सुनिश्चित करती है।
मरीज का इलाज करने वाले डॉ. राजिब लोचन भांजा, कार्डियोलॉजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल्स, बिलासपुर ने कहा कि दिल की बीमारी दुनिया में होने वाली मौतों के मुख्य कारणों में से एक है, ये रिमोट मॉनिटरिंग डिवाईसेस अचानक दिल का दौरा पड?े से मरीजों की होने वाली मौतों को उत्तम हैं। आईसीडी का परामर्श उन मरीजों को दिया जाता है, जिन्हें दिल की अनियमित धड़कन के कारण दिल का दौरा पड?े का जोखिम ज्यादा हो। इन मरीजों में वो भी शामिल हैं, जिनके दिल की खून को पंप करने की क्षमता सामान्य से कम होती है। ये डिवाईस मरीजों को समय पर मेडिकल इलाज प्राप्त करने में मदद करती हैं, जिससे उन्हें स्वास्थ्य के बेहतर परिणाम मिलते हैं।
डिवाईसेस की नैक्स्ट जनरेशन में रिमोट मॉनिटरिंग ऐप है और वो स्मार्टफोन कंपैटिबल हैं तथा ब्लूटूथ से आसानी से कनेक्ट हो सकती हैं। इससे संचार को स्ट्रीमलाईन करने और डॉक्टर एवं उनके मरीजों के बीच संलग्नता बढ़ाने में मदद मिलती है। उदाहरण के लिए, इस ऐप द्वारा मरीज अपनी हैल्थकेयर टीम को ट्रांसमिशन का इतिहास एवं डिवाईस की परफॉर्मेंस प्रदान कर उनके साथ ज्यादा संलग्न हो सकता है। इस ऐप द्वारा फिजिशियंस अपने मरीज को दूर से देख सकते हैं। वो एसिंपटोमेटिक घटनाओं तथा मरीज द्वारा ट्रिगर्ड ट्रांसमिशन को पहचान सकते हैं, जिससे समय पर इलाज करने में मदद मिलती है। रिमोट मॉनिटरिंग द्वारा मरीज अपने स्वास्थ्य की देखभाल में ज्यादा संलग्न हो सकते हैं और अस्पताल में व्यक्तिगत रूप से जाने या बार-बार जाने की जरूरत नहीं पड़ती। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मरीज को लक्षणों में सुधार के कारण ज्यादा बेहतर महसूस होता है क्योंकि अपने पसंद के काम कर सकते हैं, सेहतमंद जिंदगी जी सकते हैं और बेहतर जीवन प्राप्त कर सकते हैं।















