इंदौर
अफगानिस्तान से भारत के साथ सदियों पुराने रिश्ते पर तालिबानी कब्जे के साथ ही भारत और उसके साथ हो रहे व्यापार पर सीधा असर पड़ा है। इस दौरान सूखे मेवों की कीमतों में 30 से 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं एक महीने में कीमतों में 50 फीसदी तक की भी वृद्धि देखी गई है। काबुल से आने वाले सामानों की आवजाही रुकी हुई है। इससे प्रदेश के बाजार से बादाम, मुनक्का, अंजीर और किशमिश की कमी बनी हुई है। खुदरा बाजार में तो कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं।
तालिबानी अब से किस तरह से व्यापार करेगा, उसी पर सूखे मेवों का कारोबार निर्भर करेगा। सूत्रों का कहना है कि तालिबान भारत के निर्यात पर शुल्क बढ़ा सकता है। बहरहाल देश में हजारों व्यापारी परेशान हैं लेकिन जब तक केंद्र सरकार वहां के तालीबानी नेता से बात नहीं करती तब तक कोई रास्ता निकलता नजर नहीं आ रहा है। व्यापारियों का कहना है, अफगानिस्तान से आने वाले सूखे मेवों का असर अन्य मेवों पर भी पड़ रहा है। काजू, अखरोट व केसर के कीमतें भी बढ़ गई हैं।
प्रदेश में 20 प्रतिशत खपत
एक अनुमान के मुताबिक, अफगानिस्तान से करीब 38000 टन माल हर साल आयात किया जाता है। 2020-21 में अफगानिस्तान से 3753.47 करोड़ रुपए का माल आयात किया गया। इनमें से 2389.86 करोड़ रुपए का आयात सूखे मेवे, खट्टे फल, तरबूज व अन्य फलों का हुआ। इंदौर के व्यापारियों के मुताबिक अफगानिस्तान से आए सूखे मेवों में से 20 प्रतिशत खपत मध्यप्रदेश में हो जाती है।
ड्राय फ्रूट की बढ़ती कीमतें
| सूखे मेवे | 2 अगस्त का थोक भाव | 23 अगस्त का थोक भाव | अंतर प्रतिशत में |
| बादाम | 725 से 750 | 950 से 1000 | 31-33 प्रतिशत |
| मुनक्का | 625 से 725 | 775 से 850 | 17-24 प्रतिशत |
| अंजीर | 625 से 750 | 675 से 975 | 8-30 प्रतिशत |
| कंधारी किशमिश | 350 से 600 | 400 से 750 | 14-25 प्रतिशत |
| पिस्ता मोटा | 1000 से 1100 | 1200 से 1800 | 20-63 प्रतिशत |
(भाव रुपए प्रति किलो में)














