रश्मिरथी की पंक्तियों के बहाने तेजप्रताप ने राजद में मांगी अपनी हिस्सेदारी

पटना

राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के बड़े पुत्र और विधायक तेजप्रताप यादव ने एक रचना की पंक्तियों के जरिए पार्टी में अपनी हिस्सेदारी की मांग की है। साथ ही, नेता विपक्ष तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव पर फिर निशाना साधा है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की रचना ‘रश्मिरथी’ के बहाने तेजप्रताप ने कहा है कि मुझे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए। केवल पांच ग्राम दे दो, बाकी जो भी है उसे रख लो। उनकी इस कविता को छात्र राजद के अध्यक्ष पद से हटाए गए आकाश यादव से जोड़कर देखा जा रहा है। ‘महाभारत’ युद्ध शुरू होने से पहले के माहौल पर रची गई ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए तेजप्रताप ने अपने फेसबुक पेज- ‘सेकेंड लालू यादव’ पर लिखा है कि …तो दे दो केवल पांच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम’।

 

खुद को कृष्ण कहने वाले तेजप्रताप यादव ने बीते दिनों संजय यादव को दुर्योधन की संज्ञा दी थी। महाभारत का प्रसंग है कि भगवान श्रीकृष्ण दुर्योधन को समझाने जाते हैं कि युद्ध अच्छा नहीं। उससे काफी नुकसान होगा। इसलिए आप पांडवों को पांच गांव भी दे देंगे तो वे संतुष्ट हो जाएंगे। लेकिन, दुर्योधन उनकी बात नहीं मानता, उल्टे उनको बांधना चाहता है। इस संदर्भ के माध्यम से तेजप्रताप की ओर से संजय यादव को संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है। तेजप्रताप ने रचना की अन्य पंक्तियों का भी जिक्र किया है, – 'जब नाश मनुज पर छाता है पहले विवेक मर जाता है।' उसका भी जिक्र किया है जब कृष्ण गुस्से से कहते हैं, ‘जंजीर बढ़ाकर साध मुझे, हां, हां दुर्योधन! बांध मुझे’। इसका निहितार्थ निकाला जा रहा है कि तेजप्रताप संजय यादव से कह रहे हैं कि दम है तो मुझ पर कार्रवाई करो।  

 

वह बचपन, लड़ना- झगड़ना और मना लेना

इसके पहले तेजप्रताप ने दिल्ली में अपनी बहनों से राखी बंधवाते हुए कहा कि याद हैं हमे हमारा वह बचपन, लड़ना- झगड़ना और मना लेना। यही होता है भाई-बहन का प्यार, और इस प्यार को बढ़ाने आ रहा है- रक्षाबंधन का त्‍योहार।