काबुल एयरपोर्ट की घेराबंदी की तालिबान ने, अभी 150-180 भारतीयों के फंसे होने की खबर

नई दिल्ली
तालिबान नेता बाहरी मीडिया के सामने भले ही सबकुछ सामान्य दिखाने की कोशिश करें लेकिन हकीकत में उसके आतंकियों का रवैया दिनों दिन और आक्रामक होते जा रहा है। दो दिन पहले से ही तालिबान ने काबुल एयरपोर्ट की घेराबंदी कर रखी है। शहर से एयरपोर्ट के रास्तों में जगह-जगह बैरिकेड लगा दी है और हर आने-जाने वाले की गहन जांच पड़ताल कर रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए काबुल में फंसे अपने लोगों या शरण लेने के इच्छुक अफगानिस्तान के नागरिकों को स्वदेश लाना आसान नहीं रह गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय अपने स्थानीय संपर्को के जरिए छोटी छोटी संख्या में भारतीयों को एयरपोर्ट पहुंचाने की व्यवस्था कर रहा है। काबुल से भारतीयों को निकालने की जानकारी रखने वाले विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार देर शाम से स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गई है। एयरपोर्ट के बाहर हजारों की संख्या में लोग जमा हुए हैं। ऐसा लग रहा है जैसे पूरा शहर ही बाहर जाने को बेताब है। वहां फायरिंग की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। बड़ी मुश्किल से शुक्रवार रात को 85 भारतीयों को वायुसेना के एक विशेष विमान से ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे पहुंचाया गया है। काबुल एयरपोर्ट के बाहर अभी भी 150-180 लोगों के होने की खबर है। भारत की कोशिश इन लोगों को वहां से निकालने की है।

सूत्रों का यह भी कहना है कि एक बार एयरपोर्ट के भीतर पहुंचने के बाद वहां से बाहर निकालने की व्यवस्था करना आसान है, असली चुनौती एयरपोर्ट पहुंचने की है। एयरपोर्ट के बाहर भारी भीड़ के चलते अमेरिका ने भी अपने नागरिकों से बिना सूचना के वहां नहीं आने की सलाह दी है। भारतीय दल एक तरह से समय के विपरीत काम कर रहा है। अभी काबुल एयरपोर्ट पूरी तरह से अमेरिकी सेना के कब्जे में है। अमेरिका की तरफ से कहा गया है कि वह अपने नागरिकों और सहयोगी देशों के नागरिकों को निकालने तक एयरपोर्ट की सुरक्षा अपने हाथ में रखेगा। अमेरिका ने 31 अगस्त तक अपने सभी नागरिकों को वापस बुला लेने की बात भी कही है। ऐसे में भारत भी इस महीने से पहले तक अपने सभी नागरिकों या दूसरे शरणार्थियों को वहां से निकालने की कोशिश में है। विदेश मंत्रालय का अनुमान है कि एयरपोर्ट के बाहर जमा लोग अगर शनिवार या रविवार तक निकाल लिए जाते हैं तो वहां रहने वाले भारतीयों की संख्या कम हो जाएगी। कई भारतीय विदेशी कंपनियों के लिए काम कर रहे हैं और उन्हें वहां की कंपनियां भी निकालने के लिए काम कर रही हैं। बाद में स्पेशल उड़ानों या वाणिज्यिक उड़ानों की मदद से भी निकासी संभव होगी।

जहां तक वाणिज्यिक उड़ानों की बात है तो उसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है। एयर इंडिया की नई दिल्ली-काबुल फ्लाइट कई दिनों से रद है। पहले इस बात का संकेत था कि सप्ताहांत तक वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत हो जाएगी, लेकिन शनिवार देर रात तक इसकी संभावना नहीं है। यह भी देखना होगा कि तालिबान एयरपोर्ट प्रबंधन का काम अपने जिम्मे किस तरह से लेता है और उनका संचालन किस तरह से करता है। यह भी खतरा है कि एक बार एयरपोर्ट पर अमेरिकी सेना का सख्त पहरा खत्म होते ही फिर से हजारों की भीड़ अंदर दाखिल हो जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रण में करने को लेकर तालिबान एकदम अंधेरे में है।

बिना सूचना एयरपोर्ट में प्रवेश बंद
शुक्रवार से एयरपोर्ट के अंदर सिर्फ उन्हें ही जाने की इजाजत मिल रही है, जिनके बारे में अमेरिकी सेना को सूचना है। अमेरिकी सेना भी एक के बाद एक विमानों से अपने अफगानी सहयोगियों को बाहर निकाल रही है। भारतीय वायुसेना का एक विमान काबुल एयरपोर्ट पर तैनात किया गया है। सनद रहे कि एक दिन पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अफगानिस्तान के हालात को तनावपूर्ण करार देते हुए कहा था कि भारत की पहली प्राथमिकता अपने लोगों को वहां से सुरक्षित निकालने की है।