लखनऊ
बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बसपा द्वारा राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के नेतृत्व में किए जा रहे प्रबुद्घ सम्मेलनों को जनता का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। इससे भाजपाइयों की नींद उड़ गई है।
उन्होंने कहा कि भाजपा राज में प्रदेश की कानून व्यवस्था ध्वस्त है। प्रदेश में गरीबों व दलितों का उत्पीड़न बढ़ा है। किसान परेशान है। इसलिए 18 अगस्त से शुरू होने वाले विधानमंडल सत्र में बसपा विधायक कृषि कानूनों का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि बसपा का पूरा प्रयास है कि कृषि कानून यूपी में न लागू हो पाएं।
मायावती ने भाजपा की तरफ से बसपा को सत्ताभोगी बताए जाने पर भी जवाब दिया और कहा कि ये उनकी जातिवादी सोच का प्रतीक है। दरअसल, शनिवार को भाजपा के ट्विटर हैंडल से एक पोस्टर जारी किया गया था जिसमें मायावती व अखिलेश यादव को सत्ताभोगी जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कर्मयोगी बताया गया था।
इसका जवाब देते हुए मायावती ने कहा कि भाजपा सरकार बाढ़ग्रस्त और कोरोना पीड़ितों की मदद करने के बजाय बसपा पर टिप्पणी कर रही है। यह इनकी बौखलाहट और जातिवादी सोच का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रबुद्घ सम्मेलनों में बसपा को मिल रहे समर्थन से भाजपा परेशान है और बौखला उठी है। उन्होंने कहा कि भाजपा को बसपा पर टिप्णी करने की जगह बाढ़ व कोरोना से परेशान जनता की मदद करनी चाहिए।















