चाइनीज मीडिया पर स्विट्जरलैंड की बड़ी कार्रवाई, हटवाए सारे फर्जी आर्टिकल

बीजिंग
स्विट्जरलैंड ने चीन की सरकारी मीडिया के फर्जीवाड़े की पोल खोल दी है। दरअसल, चीन की मीडिया स्विट्जरलैंड के खिलाफ अफवाह उड़ाने के लिए वहां के एक ऐसे बायोलॉजी एक्सपर्ट की बातों को कोट कर रहा था, जो कि असल में है ही नहीं। जब स्विट्जरलैंड सरकार को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की मीडिया की करतूतों की भनक लगी तो उसने चीन से उन आर्टिकल को फौरन हटवाने को कहा और चीनी मीडिया को लाचार होकर वो झूठे कंटेंट हटाने पड़ गए। हालांकि, ऐसा करने से पहले स्विट्जरलैंड ने अपनी ओर से उस फर्जी वैज्ञानिक की छानबीन करने की पूरी कोशिश की।
 
चीन की सभी सरकारी मीडिया संस्थानों ने उन सारे फर्जी आर्टिकल को हटा दिए हैं, जो कथित तौर पर एक स्विस बायोलॉजिस्ट के हवाले से छापे गए थे और उसे लोकल और सोशल मीडिया में छापा गया था। यह मामला कोविड-19 के पैदा होने की जांच के मामले के राजनीतिकरण को लेकर था। लेकिन, बीजिंग स्थिति स्विट्जरलैंड के दूतावास को उन खबरों पर संदेह हुआ उसने उसकी तहकीकात की और पाया कि न्यूज आर्टिकल फर्जी था। बुधवार को स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि चीन के कई अखबारों की बेवसाइट ने कोरोना वायरस महामारी को लेकर की की गई फर्जी टिप्पणियों को हटा दिया है, जो कि उस स्विस बायोलॉजिस्ट का 'झूठा हवाला' देकर छापा गया था, जो कि अस्तित्व में ही नहीं है।
 
चीन की प्रेस और सोशल मीडिया में जिस कथित बायोलॉजिस्ट की टिप्पणियों का जोर-शोर से प्रचार-प्रसार किया गया था, उसके नाम की पहचान विल्सन एडवर्ड्स कहकर बताई गई थी। उस कथित एक्सपर्ट का लक्ष्य कथित तौर पर यह बताना था कि महामारी को लेकर चीन के खिलाफ जो जांच चल रही है, उन शोधकर्ताओं पर अमेरिका का दबाव है। गौरतलब है कि कोविड-19 को लेकर चीन की जो आलोचना हो रही है, उसके खिलाफ चीन की सरकार और सरकारी मीडिया ने एक आक्रामक रवैया अपनाया हुआ है और उसी कड़ी में ऐसे स्विस वैज्ञानिक का नाम लेकर कोरोना की उत्पत्ति की जांच में लगे जांचकर्ताओं पर अमेरिकी दवाब की बात कही जा रही थी, जो कि है ही नहीं।
 
चीन की जिन सरकारी मीडिया संस्थानों ने उस 'अस्तित्व विहीन' स्विस एक्सपर्ट के हवाले से यह झूठी खबरें छापी थीं, उनमें पीपुल्स डेली, चाइना डेली और चीन का नेशनल ब्रोडकास्टर सीजीटीएन भी शामिल हैं। चाइनीज मीडिया ने उस एक्सपर्ट की बातों को उसके कथित फेसबुक पेज से उठाया था। उस कथित फेसबुक एकाउंट के बारे में चीन में स्थिति स्विट्जरलैंड के दूतावास ने कहा है कि वह एकाउंट 24 जुलाई को ही ओपन किया गया था और उसके सिर्फ तीन ही फ्रेंड थे। स्विस एंबेसी के मुताबिक, 'ऐसा लगता है यह फेसबुक एकाउंट सोशल नेटवर्किंग के इरादे से खोला ही नहीं गया था।' जब स्विट्जरलैंड एंबेसी को उस कथित एक्सपर्ट के बारे में संदेह हुआ तो उसने ट्वीटर पर एक पोस्ट किया, 'विल्सन एडवर्ड्स को खोज रहे हैं, कथित बायोलॉजिस्ट, जिनका चीन की प्रेस और सोशल मीडिया में कई दिनों से हवाला दिया जा रहा है।' 'अगर आप हैं तो हम आपसे मिलना चाहेंगे।'
 
स्विट्जरलैंड एंबेसी ने इसके साथ अंग्रेजी और चाइनीज में एक विस्तृत संदेश भी दिया है, जिसमें कहा गया है कि विल्सन एडवर्ड्स नाम का कोई भी स्विस नागरिक नहीं है, जो बायोलॉजी के फिल्ड से जुड़ा है। इसमें कहा गया है, 'दुर्भाग्य से चीन की जनता को सूचित करना चाहिए कि यह खबर झूठी है।…….हम अनुरोध करते हैं कि जिस किसी ने भी इस आर्टिकल को प्रकाशित किया है, उसे हटा दें और सही जानकारी प्रकाशित करें।'