भोपाल
प्रदेश में दूर संचार सेवाओं के लिए मोबाइल, इंटरनेट सर्विस टावर लगाने वाली सरकारी और निजी कम्पनियों से लाइसेंस और कम्पाउंडिंग शुल्क वसूली के प्रावधान राज्य सरकार ने किए हैं। इसके लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने नियमों में संशोधन किया है। प्रदेश के महानगरीय क्षेत्र में टावर लगाने के लिए लाइसेंस फीस पचास हजार रुपए तय की गई है वहीं बगैर अनुमति कहीं भी टावर लगा देने पर एक लाख रुपए प्रति टावर के मान से कम्पाउंडिंग फीस वसूली जा सकेगी।
विभाग द्वारा नियमों में किए गए संशोधन में कहा गया है कि दूरसंचार सेवा, इंटरनेट सेवा, अवसंरचना प्रदाता कम्पनियों द्वारा वायर लाइन और वायरलेस आधारित वाइस और डाटा पहुंच सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही हैं। इस काम में केंद्र सरकार का उपक्रम बीएसएनएल के अलावा निजी कम्पनियों द्वारा शहरी और ग्रामीण इलाकों में टावर लगाने का काम किया जाता है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा 2019 में लागू की गई पालिसी में संशोधन किया जा रहा है। इस संशोधन के मुताबिक लाइसेंस देने वाले अधिकारी को आवेदन मिलने पर या अन्य स्त्रोत से जानकारी मिलने पर कि निजी भूमि, स्थानीय निकाय या सार्वजनिक उपक्रम, आयोग आदि की भूमि पर यदि कोई टावर या संरचना बिना लाइसेंस के स्थापित की गई है तो संबंधित अधिकारी सेवा प्रदाता कम्पनी से एक लाख रुपए प्रति टावर/स्थान के मान से कम्पाउंडिंग शुल्क वसूलेगा। इसके बाद सेवा देने वाली कम्पनी को लाइसेंस जारी किया जा सकेगा। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के आदेश में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार के विभाग या उपक्रम, प्राधिकरण, निगम, आयोग की भूमि/ संपत्ति पर टावर लगाने के लिए लाइसेंस लेना जरूरी होगा।
शासन द्वारा जो लाइसेंस शुल्क तय किया गया है उसके मुताबिक इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर के महानगरीय क्षेत्र के लिए 50 हजार रुपए प्रति संरचना स्थल जमा करना होगा। इसके साथ ही अन्य नगर निगमों के लिए यह राशि 40 हजार, नगरपालिका क्षेत्र के लिए 35 हजार, नगर परिषद के लिए 30 हजार, ग्रामीण क्षेत्र के लिए 20 हजार रुपए लाइसेंस और संरचना शुल्क तय किया गया है।













