मुरैना
कलेक्टर बी.कार्तिकेयन ने शनिवार को जिले के व्यापरियों से अपील की है कि चंबल-क्वारी नदी में बाढ़ आने से लगभग 74 गांव प्रभावित हुये है। ग्रामीणजन एवं जिला प्रशासन के सहयोग से अधिकतर ग्रामीणों को बाहर निकालकर कैम्पों में रोका गया है। उन गांवों में पानी भर जाने के कारण खाद्यान्न सामग्री नष्ट हो चुकी है। उन्होंने व्यापारियों से कहा कि हमारे अपने ही लोगों की मदद करें, आगे आयें उन्हें अपना समझें। उन गांवों में फिलहाल 10 दिन के लिये सूखा राशन उपलब्ध कराना है। कुछ समाजसेवी भोजन के पैकेट भी उपलब्ध करा रहे है। मेरी सभी व्यापरियों, समाजसेवी एवं एनजीओ से अपील है कि बाढ़ राहत के कार्य में उन लोगों का सहयोग करें। इसके लिये पका हुआ भोजन, कैम्पों में सामग्री, आटा, पशुओं के लिये चारा और तिरपाल जैसी सामग्री उपलब्ध करायेंगे तो वे लोग भी कुछ समय बाद नदी का जलस्तर कम होने से धीरे-धीरे अपने घरों तक पहुंच जायेंगे। बाढ़ आपदा का समय उनका निकल जायेगा।
कलेक्टर कार्तिकेयन ने बताया कि चंबल नदी में जलस्तर आज से फिर बढ़ने लगा है हो सकता कि चंबल नदी दोबारा उसी निशान पर पहुंचे, जहां पहले पहुंच चुकी है। इसलिये इन परिवारों को अभी भी कैम्पों में रखकर उन्हें भोजन उपलब्ध कराना है। सभी लोग इस कार्य में आगे आकर सहयोग प्रदान करें। इसके लिये अपर कलेक्टर नरोत्तम भार्गव को नोडल अधिकारी बनाया गया है। जो भी दानदाता सहयोग करना चाहते है वे अपर कलेक्टर के मोबाइल नंबर पर संपर्क कर दाल, आटा, तेल, मसाले के पैकेट बनाकर उपलब्ध करा सकते है। इसके लिये अधिकारियों के बताये अनुसार स्वयं उन गांवों को गोद लें या उन्हें अगले 10 दिन तक भोजन उपलब्ध कराने का सहयोग प्रदान करें। बैठक में कलेक्टर ने बताया कि जिले में 74 गांव प्रभावित हुये है, इसके लिये पोरसा से लेकर सबलगढ़ तक 31 राहत शिविर संचालित किये जा रहे है। इन राहत शिविरों में दो-तीन हजार लोग अलग-अलग स्थानों पर रूके हुये है। बैठक में पुलिस अधीक्षक ललित शाक्यवार, अपर कलेक्टर नरोत्तम भार्गव, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी श्रीमती रिंकू शर्मा, समाजसेवी रमेश गर्ग, मनोज जैन, जेके टायर के प्रतिनिधि सहित अन्य समाजसेवी उपस्थित थे।













