अब आसान होगा बटाईदार के लिए कर्ज और क्षतिपूर्ति

भोपाल
भूमिस्वामी से बटाई पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों को अब समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचने और फसल के लिए कर्ज लेने में आसानी होगी। इसके लिए भूमिस्वामी और बटाईदार के बीच होने वाला अनुबंध अब आॅनलाईन किया जाएगा। इसके लिए उन्हें तहसील कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। आयुक्त भू अभिलेख की पोर्टल पर आॅनलाइन अनुबंध होगा। आगे इसके लिए आॅनलाइन माड्यूल भी तैयार किया जाएगा।

राज्य सरकार ने भूमिस्वामी और बटाईदार के बीच अनुबंध कराने का निर्णय लिया था लेकिन पूरे प्रदेश में अभी तक इस तरह के अनुबंध इसलिए नहीं हो पा रहे थे क्योंकि भूमिस्वामी और बटाईदार दोनो को अनुबंध के लिए तहसीलदार के पास जाना पड़ता था। अनुबंध को पंजीकृत करने से पहले तहसीलदार को भी मौके पर पटवारी को भेजकर  फिजिकल वेरीफिकेशन करवाना पड़ता था। इतनी अधिक कार्यवाही के कारण भूमिस्वामी और बटाईदार के बीच अनुबंध नहीं हो पा रहे थे। इसके चलते बटाईदार को फसल बोने के लिए खाद, बीज पर कर्ज उसके नाम से नहीं मिल पा रहा है।

वहीं फसल समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए भी भूमिस्वामी के नाम से ही पंजीयन होता था और भूमिस्वामी को ही बेचने जाना होता था। अनुबंध के बाद भूमिस्वामी फसल बेचने में रुचि नहीं दिखाते थे इसके चलते बटाईदार को खुले बाजार में अपना गेहूं बेचना पड़ता था। अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, बाढ़, सूखे से फसल को नुकसान होने पर क्षतिपूर्ति भी भूमिस्वामी को ही मिलती थी। बटाईदार को इसका लाभ ही नहीं मिल पा रहा था।

 राजस्व विभाग ने अब भूमिस्वामी और बटाईदार के बीच होने वाले अनुबंध को आॅनलाईन करने का निर्णय लिया है। अनुबंध में शामिल जमीन का ब्यौरा खसरे और क्षेत्रफल की जानकारी एमपी भू अभिलेख पोर्र्टल से ली जाएगी। पोर्टल पर अनुबंध पंजीकृत होने के बाद रसीद भी जारी होगी। इस रसीद के आधार पर बटाईदार फसल के लिए खाद-बीज, पेस्टीसाईड की खरीदी हेतु लोन ले सकेगा। फसल पकने के पाद इसी रसीद के आधार पर बटाईदार समर्थन मूल्य पर सरकार को फसल बेचने के लिए पंजीयन करवा सकेगा और फसल बेच सकेगा।

प्राकृतिक आपदा, ओले,अतिवृष्टि अथवा सूखे से होने वाले नुकसान पर भरपाई में इस रसीद के आधार पर मुआवजा राशि बटाईदार को मिल सकेगी। जैसे ही अनुबध्ां पोर्टल पर डलेगा उसमें ग्राम और तहसीलवार दस्तावेज अपने आप दिखने लगेंगे।

बटाईदार और भूमिस्वामी के बीच किसी प्रकार के विवाद होने पर एक प्रक्रिया भी तय की गई है। मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता के अधीन मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया नियम के उपबंधों के तहत विवादों के निपटारे की प्रक्रिया बनाई गई है। तहसीलदार कोई भी आदेश जारी करने के पहले हर जुड़े हुए पक्षकार को सुनवाई का मौका भी देगा।