पटना
जातीय जनगणना की मांग धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगी है। विपक्ष के साथ ही एनडीए के सहयोगी दल भी इस मांग के समर्थन में आ गए हैं। जातीय जनगणना के मुद्दे पर राजद, हम और जदयू के सुर भी एक हो गए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार जातिगत गणना का समर्थन कर रहे हैं। गत दिवस जदयू सांसदों का दल इस संबंध में गृहमंत्री अमित शाह से भी मिला था। वहीं, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हो गए हैं।
जातीय जनगणना को लेकर हम आंदोलन तेज कर रहे हैं : लालू
आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने जातीय जनगणना की मांग को दुहराते हुए कहा कि जातीय जनगणना हर हाल में होनी चाहिए। इसे लेकर हम आंदोलन तेज कर रहे हैं। जातीय जनगणना होकर रहेगी। पार्लियामेंट में कमिटमेंट है। लालू ने बीते दो दिनों में मुलायम सिंह यादव और शरद यादव से मुलाकात पर कहा कि पुराने लोगों से मिल रहे हैं। हमसब लोग एक ही साथ हैं। शरद से मुलाकात की तस्वीरों को ट्विटर पर साझा करते हुए लालू प्रसाद ने लिखा कि वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद भाई से मुलाकात कर स्वास्थ्य लाभ की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनैतिक असमानता के विरुद्ध हमारा लंबा संघर्ष रहा है। कहा कि सांप्रदायिकता और गैर-बराबरी के खिलाफ अंतिम दम तक लड़ाई जारी रहेगी।
आज 1931 की जनगणना के आधार पर योजना बने, यह ठीक नहीं : उपेंद्र
वहीं, भागलपुर सर्किट हाउस में जदयू राष्ट्रीय संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि जातीय जनगणना की मांग वर्षों पुरानी है। आज की तारीख में अब वर्ष 1931 की जनगणना के आधार पर सरकार की योजनाएं बने तो यह त्रुटिपूर्ण है। वर्ष 2021 में नहीं हुई तो फिर 2031 में जनगणना होगी। इस दौरान काफी वक्त लग जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से आग्रह है कि इस मांग को माना जाए।
सभी तबकों के विकास के लिए जातीय जनगणना बेहद जरूरी : जीतनराम मांझी
पूर्व मुख्यमंत्री और हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने कहा है कि सभी तबकों के विकास के लिए यह जरूरी है कि देश में जातीय जनगणना कराई जाए। दिल्ली में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य जो जातियां हैं, उनकी वास्तविक संख्या की जानकारी मिल सकेगी। ऐसे में सरकार को विकास से वंचित लोगों के लिए योजना बनाने में मदद मिलेगी।













