मध्य प्रदेश में नौ हजार पटवारियों के नहीं होंगे तबादले

राजस्व विभाग ने संविलियन नीति 2021 जारी की, 26 मार्च 2018 के पहले भर्ती हुए पटवारी ही आएंगे दायरे में

भोपाल
मध्य प्रदेश में अब पटवारियों को भी एक जिले से दूसरे जिले में पदस्थ किया जा सकेगा। इसके लिए राजस्व विभाग ने संविलियन नीति 2021 लागू की है। इसमें 26 मार्च 2018 के पहले भर्ती हुए पटवारियों को ही संविलियन का मौका मिलेगा। इस प्रविधान से करीब नौ हजार पटवारियों का संविलियन नहीं हो पाएगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि इन्होंने स्वेच्छा से जिलों का चयन किया था। प्रदेश में पटवारियों के स्वीकृत पद 19 हजार हैं। इनमें से 17,500 भरे हुए हैं। नौ हजार पदों पर भर्ती 2018 में हुई थी। इसमें वरीयता के आधार पर जिले आवंटित किए गए हैं।

ऐसे में इन्हें पसंद के जिले में पदस्थ करने से दूसरे कर्मचारी प्रभावित होते, जो न्यायोचित नहीं था। इसके मद्देनजर विभाग ने तय किया है कि बरसों से दूसरे जिलों में पदस्थ पटवारियों को प्राथमिकता के आधार पर मौका दिया जाएगा। हालांकि, नीति में यह प्रविधान रखा है कि पटवारी की पत्नी या पति, यदि शासकीय कर्मचारी और दूसरे जिले में पदस्थ है तो एक ही जिले में पदस्थ किया जा सकेगा। इसी तरह विवाहित महिला, कल्याणी विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता, कैंसर, किडनी, डायलिसिस, ओपन हार्ट सर्जरी सहित अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित पटवारी का भी संविलियन हो सकेगा। कोरोना से माता, पिता, पति या पत्नी की मृत्यु होने की स्थिति में भी पटवारियों को संविलियन की पात्रता रहेगी। जिन पटवारियों के खिलाफ लोकायुक्त या आपराधिक प्रकरण चल रहे हैं, उनका संविलियन नहीं किया जाएगा।

स्थान रिक्त होने पर संविलियन

  • संविलियन संबंधित जिले में पद रिक्त होने की सूरत में ही होगा।
  • आरक्षण और जिला आरक्षण रोस्टर का पालन करते हुए ही संविलियन होगा।
  • अनारक्षित वर्ग के पटवारी का संविलियन अनारक्षित रिक्त पद होगा।
  • आवेदन ऑनलाइन करने होंगे, पात्रता का आधार भी इसमें शामिल करना होगा।
  • संविलियन आदेश जारी होने के 15 दिन में उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
  • जिले में पदस्थापना कलेक्टर करेंगे पर गृह तहसील में पदस्थ नहीं किया जाएगा।
  • एक बार संविलियन से जिला आवंटित होने के बाद परिवर्तन की पात्रता नहीं होगी।
  • वरिष्ठता की गणना संवर्ग में जिले में प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाएगी।