करनौद के शासकीय उद्यान से ईमारती वृक्षों की बिना अनुमति के कटाई

जांजगीर-चांपा
वरिष्ठ आला अफसरों की अनुमति लिये बगैर शासकीय उद्यानों में लगे ईमारती वृक्षों को काटे जाने का मामला प्रकाश में आया है। बताया जाता है कि वृक्षें की इन कटाई के पीछे उद्यान में पदस्थ अधीक्षक की मौन सहमति रहस्य बनी हुई है। बताया जाता है कि इन ईमारती लकडिय़ों से प्राप्त राशि को शासकीय कोष में जमा नहीं किये जाने से उनकी कार्यशैली पर प्रश्र वाचक चिन्ह लगा हुआ है। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उद्यान विभाग के सहायक संचालक ने मामले की जांच कर संबधित पक्षों के खिलाफ उचित कार्रवाई किये जाने का आवश्वासन दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के बम्हनीडीह विकासखंड के अंतर्गत ग्राम करनौद में शासकीय उद्यान के देखरेख की जवाबदारी वहां पदस्थ अधीक्षक को सौंपी गई है। बताया जाता है कि वहां पदस्थ अधीक्षक के द्वारा शासन द्वारा कटाई के लिये प्रतिबंधित पेड़ सागौन और खम्हार पेडों की कटाई भी अन्य वृक्षों के साथ की गई और फिर उन्हें बेचा गया। शासकीय उद्यान करनौद से हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई और बेशकीमती लकडिय़ों को बाजार में बेचे जाने का यह पहला मामला नहीं है। उद्यान अधीक्षक के खिलाफ इससे पहले भी कई बार इस तरह की शिकायतें मिल चुकी हैं लेकिन अब तक विभाग की ओर से उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

गोलमोल जवाब दे रहे अधीक्षक
इस मामले को लेकर जब करनौद उद्यान के अधीक्षक हरनारायण दिवाकर से बात की गई तो पहले तो उन्होंने उद्यान परिसर से पेड़ों की कटाई नहीं करवाए जाने की बात कही, मगर जब उन्हें बताया गया कि उद्यान परिसर से कटवाए गए सागौन और खम्हार के पेड़ों की तस्वीरें और वीडियोग्राफ्स कुछ लोगों के पास मौजूद हैं तो वे गोलमोल जवाब देने लगे। वे कहने लगे कि पेड़ों की कटाई करवाई गई है मगर, उसमें सागौन और खम्हार के पेड़ हैं या नहीं, यह पता करवाना पड़ेगा। वहीं उद्यान परिसर से कटवाए गए पेड़ों की लकडिय़ों को बाजार में बेचे जाने के सवाल पर भी वे गोलमोल जवाब देकर बचने की कोशिश करते रहे।

शिकायतों की लंबी फेहरिस्त
शासकीय उद्यान करनौद के अधीक्षक के खिलाफ शिकायतों की लंबी फेहरिस्त है। खास बात यह है कि शासन-प्रशासन ने समस्त विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारियों को निर्धारित मुख्यालय में निवास करने का आदेश-निर्देश दे रखा है, इसके बावजूद करनौद के उद्यान अधीक्षक दिवाकर जांजगीर से आना-जाना करते हैं। बताया जाता है कि वे ड्यूटी से अधिकतर नदारद रहते हैं। ऐसे में करनौद उद्यान का सारा कामकाज चौकीदार एवं चतुर्थ श्रेणी के अन्य कर्मचारियों के जिम्मे संचालित होता है।

नहीं दी गई है अनुमति
शासकीय उद्यान करनौद से पेड़ों की कटाई करवाने किसी तरह की कोई अनुमति नहीं दी गई है और न ही वहां से पेड़ों की कटाई कराए जाने की कोई जानकारी है। उद्यान अधीक्षक ने यदि ऐसा किया होगा तो इसकी जानकारी लेकर उचित कार्यवाही की जाएगी।
-एनएस पटेल, सहायक संचालक, उद्यान