ओएनडीसी नेटवर्क ई-कॉमर्स कंपनियों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए होगा – खंडेलवाल

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी, चेयरमेन मगेलाल मालू, अमर गिदवानी, प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी, कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव, परमानन्द जैन, वाशु माखीजा, महामंत्री सुरिन्द्रर सिंह, कार्यकारी महामंत्री भरत जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल एवं मीड़िया प्रभारी संजय चौंबे  बताया कि केंद्र सरकार ने कल ओपन नेटवर्क डिजिटल कॉमर्स एडवाइजरी काउंसिल के गठन किया है जिसके लिए केंद्र सरकार की सराहना करते हुए कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने कहा कि सरकार की मंशा एक ओपन नेटवर्क प्रोटोकॉल के रूप में डिजिटल कॉमर्स के लिए एक ओपन नेटवर्क प्रदान करने की है जो ई-कॉमर्स कंपनियों, विक्रेताओं एवं खरीदारों को किसी भी नेटवर्क-सक्षम एप्लिकेशन सामान बेचने और खरीदने के लिए सक्षम बनाएगा ।

कैट ने भारत में ई-कॉमर्स व्यवसाय में सुधार हेतु इस तरह की अभिनव पहल करने के लिए केंद्रीय वाणिज्य मंत्री  पीयूष गोयल की सराहना की है। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी एवं प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा की  “ये पहल दुनिया में किसी भी सरकार द्वारा ई-कॉमर्स क्षेत्र में किये गए प्रयासों में सबसे अलग है, जो ई-कॉमर्स के किसी भी माध्यम से अपनी व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन करने वाली सभी ई-कॉमर्स पोर्टल को एक समान अवसर प्रदान करेगी“ ।
पारवानी एवं  दोशी ने बताया कि खंडेलवाल को वाणिज्य मंत्रालय द्वारा ओएनडीसी एडवाइजरी कॉउन्सिल  के सदस्य के रूप में नामित किया गया है और कैट पिछले कई वर्षों से देश के ई-कॉमर्स बाजार में समान स्तर के प्रतिस्पर्धी वातावरण की वकालत करते हुए एक राष्ट्रीय आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है। पारवानी  एवं  दोशी  ने कहा की प्रख्यात प्रौद्योगिकीविद्  नंदन नीलकेनी और अनुभवी सरकारी अधिकारी आर.एस.शर्मा को शामिल करने से परिषद की कार्यवाही तकनीकी रूप से सबसे व्यवस्थित तरीके से समृद्ध होगी। एनएसडीएल, एनपीसीआई और क्यूसीआई को शामिल करना डिजिटल कॉमर्स के लिए एक खुला नेटवर्क बनाने के लिए काफी फायदेमंद कदम साबित होगा।

पारवानी और दोशी ने कहा कि यह प्रशंसनीय है कि केंद्रीय वाणिज्य मंत्री  पीयूष गोयल ने कुछ प्रमुख ई-टेलर्स द्वारा ई-कॉमर्स व्यापार में लगातार की जा रही कुप्रथाओं का संज्ञान लिया है और ई-कॉमर्स व्यवसाय को सुव्यवस्थित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। हालाकि कॉउन्सिल के संदर्भ की शर्तों को अधिसूचित किया जाना बाकी है लेकिन ई-कॉमर्स के एक विशेषज्ञ के रूप में  पारवानी ने कहा कि“ ऐसा प्रतीत होता है कि ओएनडीसी मौजूदा प्लेटफॉर्म-केंद्रित डिजिटल कॉमर्स मॉडल से बिलकुल अलग होगा जो की वर्तमान में खरीदार और विक्रेता को व्यापार लेनदेन करने के लिए एक ही मंच का उपयोग करने की मजबूरी तय करता है ! जबकि ओपन नेटवर्क प्लेटफॉर्म पर सबके लिए खुले नेटवर्क से जुड़े पोर्टल, खरीदार और विक्रेता इस बात  के बावजूद की वो केवल एक पोर्टल से जुड़े हैं, किसी से भी सामान खरीद सकते हैं या विक्रेता किसी को भी सामान बेच सकते हैं। संभवतः, यह भुगतान में यूपीआई की तरह, ई मेल में  आईएमएपी , एसएमटीपी प्रोटोकॉल और एचटीटीपी वर्ल्ड वाइड वेब पर डेटा संचार और ब्राउज़िंग के लिए है, वैसे ही ओएनडीसी भी भारत में डिजिटल कॉमर्स के लिए एक सकारात्मक प्लेटफार्म बनने की उम्मीद है।
पारवानी एवं  दोशी ने यह भी कहा कि ओपन नेटवर्क प्रोटोकॉल अंतिम लाभार्थियों अर्थात ग्राहकों के लिए कई मायने में लाभदायक साबित होगा। ओपन नेटवर्क में मूल्य और नई तकनीक को अनलॉक करने के लिए एक इंटरऑपरेबल ओपन प्लेटफार्म बनाकर ग्राहक, एप्लिकेशन डेवलपर्स, सरकारें और व्यवसाय करने वाले लोग फायदा उठा पाएंगे ! यह एमएसएमई और छोटे व्यापारियों के लिए सबसे अधिक प्रभावशाली होगा जो ई कॉमर्स के जरिये मूल्य को अनलॉक कर अपने व्यापार को बढ़ाना चाहते हैं। भारत जैसे देश के पैमाने पर डिजिटल कॉमर्स के लिए एक समान अवसर तैयार करने के लिए यह दुनिया में अपनी तरह की पहली पहल होगी।
पारवानी एवं  दोशी ने आगे कहा कि ऐसे समय में जब वर्तमान समय में ई-कॉमर्स व्यापार जोड़-तोड़, कानूनों और नियमों का पालन न करने से अत्यधिक दूषित है, सरकार के लिए ऐसे सभी तत्वों को हटाने के लिए पहल करना बहुत आवश्यक है जो कि देश के छोटे व्यापारियों या उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचा रहे है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार को नीति संरक्षण प्रदान करना है और इसके साथ ही ई कॉमर्स विकास के सभी पहलुओं की निगरानी करना है और भारत में ई-कॉमर्स व्यवसाय के लिए बाजार की रणनीति को बढ़ावा देना है।