योजनाओं के भ्रमजाल में पत्रकार भी खाली हाथ

भोपाल

 

मध्य प्रदेश सरकार ने कोरोना से उजड़े परिवारों के लिए कई योजनाओं की बहुप्रचारित घोषणायें तो कर दीं लेकिन आज भी योजनायें पूरी तरह  जमीन पर  राहत नहीं दे पा रही हैं।

 प्रदेश कांग्रेस मीडिया उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने सरकार से मांग की है कि वह घोषणाओं को जमीन पर उतारे ताकि उजड़े हुए परिवारों ,अनाथ हुए बच्चों और बिखर रहे कोरोना वारियर्स एवं फ्रंटलाइन वर्कर्स का सामाजिक पुनर्व्यवस्थापन हो सके।

 गुप्ता ने कहा ऐसे 10हजार परिवारों के समाचार सार्वजनिक हो रहे हैं  जिन्हें तत्काल सहायता की जरूरत है। मुख्यमंत्री जी स्वयं घोषणाओं की असलियत शहडोल में जान चुके हैं जहां बड़ी संख्या में गरीबों ने राशन ना मिलने की सार्वजनिक शिकायतें की हैं और मुख्यमंत्री को स्थानीय मंत्री बिसाहूलाल से जवाब तलब करना पड़ी है ।

गुप्ता ने कहा कि सरकार ने इसी तरह पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर और कोरोना  वारियर मानने संबंधी घोषणा की थी किंतु शिवअनुराग पटैरिया, राजकुमार केसवानी, राजकुमार अवस्थी जैसे कई बड़े पत्रकार प्रदेश भर में कोरोना के कारण जान गंवा चुके हैं। इन परिवारों को सरकार ने फ्रंटलाइन वर्कर और कोरोना वारियर के अनुरूप क्या सहायता दी है, यह सार्वजनिक होना चाहिए। लोगों को अभी तक राशन की पर्चियां तक जारी नहीं हुई है जबकि उनके आवेदन पोर्टल पर दो महीने से डले हैं।कई योजनाओं की 4 महीने हो जाने के बावजूद अभी तक नीति निर्धारित नहीं हुई है। यह जन भावनाओं के साथ धोखा है ।

उन्होंने कहा की कांग्रेस मांग करती है कि जल्द से जल्द इन योजनाओं का प्रारूप तैयार हो ताकि हितग्राही और ना भटकें। गुप्ता ने मांग की कि सरकार ने कितने पत्रकारों को मुफ्त चिकित्सा उपलब्ध कराई और मृतक पत्रकारों के परिवारों को क्या सहायता दी यह सार्वजनिक करना चाहिए तभी महामारी के शिकार लोगों के साथ सच्चा न्याय होगा।