भोपाल
प्रदेश में 33 निजी और 21 सरकारी विश्वविद्यालय हैं। कोरोना संक्रमण ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से चौपट कर दिया है। विद्यार्थियों की कक्षाएं लगाना तो दूर उनकी परीक्षाएं कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग को काफी कवायद करना पड़ी है। विद्यार्थियों को किताबों से कॉपियों को भरवाया गया है। ऐसे विद्यार्थियों को दीक्षांत में गोल्ड मेडल देने तैयार नहीं हैं, लेकिन विवि मेरिट जारी करेंगे। दो सत्रों के गोल्ड मेडल को सभी विवि सस्पेंड कर रहे हैं। इसे लेकर शासन स्तर पर विचार-विमर्श शुरू हो गया है।
कोरोना काल ने पूरे दो साल की अध्ययन व्यवस्था को चरमरा कर रख दिया है। आगामी सत्र में पढ़ाई क्या व्यवस्था रहेगी। इसका निर्णय कोरोना की आने वाली तीसरी लहर करेगी। गत और वर्तमान सत्र में प्रदेश के सभी निजी और सरकारी विवि विद्यार्थियों की कक्षाएं लगाने में ज्यादा कुछ नहीं कर पाए हैं। यहां तक आॅनलाइन कक्षाएं भी सिर्फ खानापूर्ति का कार्य करती रही हैं।
पिछले दो सत्रों में विद्यार्थियों ने सिर्फ किताबों को देखकर अपनी परीक्षाएं दी हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल कैसे दिया जा सकता है। इसी सवाल पर सभी विवि विचार कर रहे हैं। कुछ विवि ने गोल्ड मेडल नहीं देने का निर्णय लिया है। उनका तर्क है कि गोल्ड मेडल नहीं दिया जाएगा। क्योंकि विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल देने लायक विद्यार्थियों को मेहनत नहीं करना पड़ी है, लेकिन उनकी मेरिट जरूर जारी की जाएगी।
उच्च शिक्षा विभाग का हरेक विवि यूजी और पीजी कोर्स में करीब दो दर्जन गोल्ड मेडल देता है। इसके बाद स्मृति में कुछ गोल्ड मेडल दिये जाते हैं। इससे उनकी संख्या करीब तीस तक पहुंच जाती है। सभी विवि औसतन बीस गोल्ड मेडल देते हैं। दोनों सत्रों में गोल्ड मेडल रोक दिये जाते हैं, तो विवि का दीक्षांत में होने वाले खार्चों में गोल्ड मेडल में होने वाला लाखों व्यय बचेगा।
प्रदेश सरकार ने गत वर्ष लॉकडाउन के तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मापदंडों का हवाला देकर पीजी और यूजी के अंतिम सेमेस्टर और वर्ष की ओपन बुक एग्जाम कराई थीं। जबकि शेष वर्ष और सेमेस्टर में जनरल प्रमोशन दिया गया था। वर्तमान में कोरोना कर्फ्यू में सभी वर्ष और सेमेस्टर में ओपन बुक एग्जाम कराए जा रहे हैं। हालांकि दो साल में विद्यार्थियों को कक्षाओं और परीक्षाओं के लिये ज्यादा मशक्कत नहीं करना पड़ी है।
















