नई दिल्ली
जून 2020 में गलवान घाटी की घटना के बाद से भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बेहद गंभीर हो गया है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी इस विवाद के बीच ठंडा मौसम सैनिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होता है। ऐसे में अब भारतीय सेना ने इन इलाकों में सैनिकों के लिए बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिए हैं। एलएसी और नॉर्थ ईस्ट के इलाकों में सेना ने ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है जिससे जवानों को सर्दियों के मौसम में -45 डिग्री में भी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि ये काम पूरे 5 सालों में किया जाना था लेकिन तेजी दिखाते हुए इसे एक साल के भीतर पूरा किया गया। इस वक्त जितने सैनिक लद्दाख में तैनात हैं उनसे दोगुनी संख्या इन इंफ्रास्ट्रक्चर में आराम से रह सकती है।
बता दें कि सीमा विवाद की शुरुआत से ही भारतीय सैनिकों के लिए सर्दी का मौसम सबसे बड़ा चैलेंज माना जाता रहा है। यहां पारा -45 डिग्री तक गिर जाता है। ऐसे में तैनात जवानों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता था। लेकिन जो नए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए गए हैं वो किसी प्लास्टिक के घर जैसे लगते हैं। इन स्ट्रक्चर्स में जवानों के रहने के लिए सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। पूर्वी लद्दाख के इलाके में भले ही डिस्इंगेजमेंट की प्रक्रिया हुई हो लेकिन चीन की चालबाजियों देखते हुए भारत की तरफ से पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
खबर है कि इंजीनियरिंग कोर अभी भी एलएसी पर ऐसे ढांचों के निर्माण में लगी हुई है ताकि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सैन्य बल वहां से अभियान चला सकें और रह सकें। भारत एलएसी पर सभी सेक्टरों में सड़क ढांचे विकसित करने में भी जुटा है। इधर, रक्षा मंत्रालय भी जल्द ही बीआरओ को नई सड़क पर कनेक्टिविटी के लिए 4.5 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने की अनुमति देने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए तैयार है।












