नई दिल्ली
सोनिया गांधी, शरद पवार, ममता बनर्जी, एमके स्टालिन, सीताराम येचुरी समेत विपक्षी दलों के नेताओं ने मंगलवार को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को पत्र लिखकर "स्टेन स्वामी पर झूठे मामले थोपने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। आदिवासियों और दलितों के लिए लंबे समय तक काम करने वाले फादर स्टेन स्वामी को पिछले साल एनआईए ने अरेस्ट किया था। जेल में जब उनकी तबीयत बहुत खराब हो गई थी। लंबे समय से बीमार स्टेन स्वामी की सोमवार को निधन हो गया था।
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को लिखे पत्र में विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि जेसुइट पुजारी और एल्गर परिषद मामले के एक आरोपी स्टेन स्वामी को कठोर यूएपीए के तहत झूठे आरोपों में फंसाकर जेल में डाल दिया गया था और उनकी विभिन्न बीमारियों को नजरअंदाज कर उन्हें इलाज नहीं दिया गया। विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को पत्र लिखकर भीमा कोरेगांव के आरोपी स्टेन स्वामी पर झूठे मामले थोपने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भारत सरकार को निर्देश देने का आग्रह किया है।
पत्र में आगे लिखा गया है कि यूएपीए, देशद्रोह जैसे कठोर कानूनों के तहत भीमा कोरेगांव और अन्य राजनीति से प्रेरित मामलों में जेल गए सभी लोगों को तुरंत रिहा किया जाए। बता दें कि, 2017 में पुणे के भीमा कोरेगांव में नए साल के जश्न के दौरान दलित और मराठा समुदाय के बीच हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान एक शख्स की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए थे। दलित और बहुजन समाज के लोगों ने हिदुत्व राजनीति के खिलाफ कई जनसभाएं कीं। बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के भाषण के दौरान ही हिंसा भड़क उठी थी।
ड्रोन हमले से निपटने के लिए वायुसेना ने शुरू की तैयारी, खरीदेगी 10 एंटी-ड्रोन सिस्टम इस हिंसा के बाद पुणे पुलिस ने कई शहरों में एक साथ छापेमारी कर 5 कथित नक्सल समर्थकों को अरेस्ट कर लिया। दिल्ली, फरीदाबाद, गोवा, मुंबई, रांची और हैदराबाद में छापे मारे गए। गिरफ्तार किए गए लोगों में गौतम नवलखा, केपी वरवर राव और सुधा भारद्वाज शामिल थीं। जांच के दौरान एल्गार परिषद के भाषणों के आधार पर फादर स्टेन स्वामी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया। अक्टूबर, 2020 में एनआईए ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
















