इटावा
पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के पैतृक गांव में बनाई गई सैफई हवाई पट्टी को प्रशिक्षण अकादमी को देने की तैयारी कर ली गई है। राज्य सरकार की ओर से उड्डयन नीति में किए गए बदलाव के बाद यह निर्णय लिया गया है। प्रदेश की कुल 17 हवाई पट्टी में से 12 हवाई पट्टियों को पहले ही पीपीपी मॉडल पर फ्लाइंग क्लब व प्रशिक्षण एकेडमी को देने का प्रस्ताव था। जिसके बाद बाकी बची हुई हवाई पट्टी को भी अब इसमें शामिल कर लिया गया।
वर्तमान में सैफई हवाई पट्टी केवल वायुसेना व वीआईपी मूवमेंट में ही प्रयोग की जा रही थी। ऐसे में नियमित खर्च के साथ ही यहां संचालन में आ रही कमियों को भी अब राज्य सरकार की ओर से दूर किया जाएगा। सोमवार को प्रदेश सरकार की ओर से नई उड्डयन नीति के संबंध में कैबिनेट में प्रस्ताव पारित किया गया जिसके तहत वर्ष 2007 में बनाई गई नीति के अनुसार प्रदेश में संचालित 12 हवाई पट्टियों को फ्लाइंग क्लब व प्रशिक्षण एकेडमी को देने व इनका संचालन पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर करने की नीति में विस्तार किया गया।
जिसके तहत सैफई समेत अलीगढ़, अंबेडकर नगर, कानपुर देहात, बरेली समेत कई अन्य जिलों की हवाई पट्टियों को भी इस योजना में शामिल कर लिया गया। राज्य सरकार के इस निर्णय के बाद निश्चित तौर पर सैफई हवाई पट्टी को एक बार फिर से नई पहचान मिलेगी। पूर्व में वायु सेना द्वारा यहां दो बार युद्धाभ्यास भी किया जा चुका है और वह काफी सफल भी रहा था। ऐसे में अब जल्द ही सैफई व उसके आसपास के जिलों के आसमान में फ्लाइंग क्लब के छोटे बड़े विमान उड़ते नजर आएंगे। पिछले दिनों यहां नाइट विजन लैंडिंग को लेकर भी सर्वे कराया गया था। इसके अलावा एटीएस टावर की स्थापना को लेकर पूर्व सपा सरकार ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भी भेजा था, लेकिन राज्य सरकार के भेजे गए प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने ठुकरा दिया था। ऐसे में अब फ्लाइंग क्लब अथवा प्रशिक्षण एकेडमी की स्थापना से पहले यहां एयर ट्रैफिक कंट्रोल के टावर की स्थापना भी राज्य सरकार द्वारा कराई जा सकती है।















