शरद पूर्णिमा की रात में , चांदनी रात में ,चंद्रमा के प्रकाश से मार्ग निर्देशन लेते हुए गोपियां आज के दिन भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन करती है…….

गुरु वाणी,

जिसने अपने 64 कलाओं के साथ अमृत का कुंड ले करके , चंद्रमा हम सब के जीवन को अमृत मय बनाने वाले हैं । रात्रि पहर में , साथ मे सद्गुण स्वरूप गोपिया और अखंड ब्रम्हांड के नायक परमात्मा , दोनों का मिलन होता है।           शरद पूर्णिमा की रात में चांदनी रात में ,चंद्रमा के प्रकाश से मार्ग निर्देशन लेते हुए गोपियां आज के दिन भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन करती है :आज ही के दिन यह शरद पूर्णिमा का अद्भुत दुर्लभ संयोग होता है , प्रातः काल रात्रि में चंद्रमा की चांदनी में खीर का प्रसाद रखना और सूर्योदय होने के पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में प्रसाद ग्रहण करना ताकि सब के लिए अमृत हो । सभी को शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए पूज्य गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी ( गुरुजी ) ने यह बताएं कि सदगुरु वैद्य वचन विश्वशा … हमेशा अपने सद्गुरु रूपी वैद्य के वचन में हमेशा विश्वास हो। सतगुरु से बढ़कर कोई वैद्य नहीं है इनको वचनों में विश्वास किया जाए सतगुरु का वचन ही सबसे बड़ा वैद्य है । हनुमान जी को संत कहा गया है हनुमान जी सबसे छोटा रूप धार करके सुखेन वैद्य के पास जाते हैं।

गुरु के पास हमेशा छोटा बन कर जाना चाहिए..
जब गुरु के सामने छोटा बनते हैं गुरु तुरंत प्रकट हो जाते हैं, जिसने अपने आप को बड़ा किया वह कभी गुरु की कृपा नहीं पा सकते शरीर भले ही पा लेगा , जिसने अपने अहम को आकार दे दिया अहंकार से ग्रसित हो गया, वह कभी कुछ प्राप्त नहीं कर सकता है कुछ पाने के लिए आकार देना नहीं है और जो प्रकार है वह उसको भी मिटा लेना है छोटा हो जाना है तो हनुमान जी गुरु के सामने स्वयं को मिटाते हैं गुरु की आवश्यकता हमेशा होती है ।
अति लघु रूप धरेउ हनुमंता आनेउ भवन समेत तुरंता…
अर्थात अपने आप को लघु रूप में धारण करना है जैसे ही अपने आप को छोटा बना लिए गुरु तुरंत ही चले जाते हैं पहले छोटा तो बने और पूरा भवन ले कर के आ गए । सुख का अयन, सुख का भवन सुख आ जाए जहां पर । गढ़ लंका में चारों तरफ दुर्गति ही दुर्गति है , वहां पर भी सुख प्रदान करने वाले रहते हैं, जहां पर दुष्ट ही दुष्ट है राक्षस है, वहाँ भी मध्य लंका में सुख प्रदान करने वाला है जिसे कहते हैं सुखेन वैद्य
राम भगत संजीवनी ,पर्वत वेद पुराण …
संजीवनी पर्वत पर मिलती है, भगवान ने पर्वत सभी पर्वत को वेद, पुराण कहा है । अर्थात समस्त पर्वत ही वेद पुराण है जब हम वासना से ग्रसित होते हैं ,मूर्छित होते हैं, तब हमें शास्त्रों का सहारा लेना पड़ता है और बताते कौन है ? गुरु बताते हैं, जिस प्रकार हनुमान जी संजीवनी बूटी को पहचान नहीं पाए , यह संकेत दिए कि हम भी शास्त्रों को समझ नहीं पाते जब शास्त्र को उठाकर गुरु के सन्मुख जाते हैं गुरु उसका अर्थ बता देते हैं, हनुमान जी पूरे पहाड़ लेकर के सुखेन वैद्य के सामने आ जाते है, हनुमान जी पहाड़ लाते समय संजीवनी बूटी लाते समय अयोध्या में मूर्छित होकर गिर जाते हैं भरत जी संकेत देते हैं हमेशा ऊपर उठो लेकिन जब अपने गुरु के धाम आते हैं तब नीचे आ जाओ। उस स्थान को प्रणाम करो। साथ में यह बताया गया कि वेद पुराण का स्थान हमेशा सर्वोच्च होता है, वह गिरता नहीं है गिरे हुए को उठाने वाला होता है , संजीवनी बूटी मध्य में रहती है नीचे नहीं गिरते है, जब काम रूपी बाण लगता है तो लंका में गिर जाते हैं, और जब राम का बाण लगता है तो राम की जन्मभूमि अयोध्या में गिरते हैं । और लक्ष्मण जी जो स्वयं शेषनाग के अवतार है जो ना कट सके, वह शेष है । शेष कभी कटता नहीं है और लक्ष्मण जी शेषनाग के अवतार हैं और भगवान की गोद में है तो वह कैसे मिट सकता है, हनुमान जी संजीवनी बूटी लाते हैं और लक्ष्मण जी तुरंत युद्ध के लिए तैयार हो जाते हैं मेघनाथ को समाप्त करने के लिए तैयार हो जाते हैं। मानस में तीन पात्रों को महत्वपूर्ण बताया गया है,रावण, कुंभकरण, और मेघनाथ । रावण जो मोह से ग्रसित है अर्थात अज्ञान रूपी मोह और मेघनाथ काम वासना से ग्रसित है, कुंभकरण जो अहंकार से ग्रसित है, जो हमेशा सोए हुए होते हैं। आज समाज में सबके अहंकार भले ही जागृत है लेकिन अहंकार एक दिन ही जगता है बाकी दिन सोए हुए है भगवान इन तीनों को समाप्त करते हैं और सद्गुण की स्थापना करते हैं धर्म की स्थापना करते है।