व्यक्ति का कर्म ही उनके व्यक्तित्व का परिचायक होता है’ – स्वामी अव्ययात्मानन्द 

रायपुर

व्यक्ति यदि अच्छा बोले, किसी विषय पर उनकी अच्छी पकड़ हो, केवल इससे उनके व्यक्तित्व को परिभाषित नहीं किया जा सकता। व्यक्ति के दैनिक जीवन का कार्य एवं व्यवहार ही उनके व्यक्तित्व का परिचायक होता है। महान व्यक्ति के कर्म और विचार संक्षिप्त में बहुत कुछ कह जाते हैं। यदि व्यक्ति अपने जीवन में अहंकार का त्याग कर दे तो प्रेम से सबको जीत सकता है।

उक्त बातें विवेकानन्द आश्रम के सचिव श्रीमत् स्वामी अव्ययात्मानन्द ने विवेकानन्द मानव प्रकर्ष संस्थान द्वारा विद्यापीठ में आयोजित परिसंवाद की अध्यक्षता करते हुए कहा।

संस्था द्वारा श्रीमाँ सारदा जयंती की पूर्व संध्या में परिसंवाद आयोजित किया गया था जिसमें वक्ताओं के द्वारा श्रीमाँ सारदा देवी के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया। विवेक ज्योति मासिक पत्रिका के सम्पादक स्वामी प्रपत्यानन्द ने ‘संघजननी माँ सारदा’ विषय पर अपने वक्तव्य में कहा कि – जिस तरह समुद्र की गहराई से रत्न की प्राप्ति होती है उसी तरह श्रीमाँ के जीवन की गहराईयों से व्यक्ति को अमरत्व की प्राप्ति होती है। श्रीरामकृष्ण संघ की स्थापना एवं उसके स्वरूप के निर्धारण में श्रीमाँ की महती भूमिका रही है। उनके जीवन में प्रेम एवं वात्सल्य का दर्शन होता है और यहीं संघ का मूलमंत्र है। इस अवसर पर डॉ. कल्पना मिश्रा ने ‘ज्ञान दायिनी श्रीमाँ सारदा’ पर वक्तव्य प्रस्तुत् किया। उन्होंने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में श्रीमाँ के जीवन की समस्त पहलुओं को छूने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि माँसारदा देवी का पूरा जीवन अलौकिक एवं दैदिप्यमान रहा है। भक्ति, विश्वास और पवित्रता उनके जीवन का सार रहा है, वे अच्छे, बुरे, पापी-तापि सभी पर प्रेम भाव बरसाती थीं। विवेकानन्द मानव प्रकर्ष संस्थान के निदेशक डॉ. ओमप्रकाश वर्मा जी ने ‘सन्तानवत्सला श्रीमाँ सारदा’ विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि -श्रीमाँ सारदा के जीवन में ईश्वरीय मातृत्व साकार हुआ था। सामान्य रूप से माँ के प्रेम की सीमा होती है। वह अपने पुत्र को जितना प्यार करती है, उतना वह दूसरे के पुत्र को नहीं करती। पर श्रीमाँ का प्रेम सीमाविहीन था। सुन्दर-कुरूप, सन्यासी-गृहस्थ, पवित्र-अपवित्र सभी श्रीमाँ के प्रेम के भागीदार हुए।

कार्यक्रम का प्रारंभ श्रीमाँ सारदा के चित्र पर दीप-प्रज्ज्वलन और पुष्पार्पण से हुआ। विद्यापीठ विद्यालय के छात्रों ने वेदपाठ और माँ सारदा की स्तुति में भजन गाये। डॉ. समीर ठाकुर ने अतिथियों का परिचय दिया। श्रीमती मनीषा चन्द्रवंशी ने कार्यक्रम का संचालन किया।