मनरेगा से बने डबरी से मिला सिंचाई का साधन, सब्जी की खेती से गोपाल ने बढ़ाई कमाई

कोरिया
कई बार महज एक साधन आपकी समस्या रुपी ताले की चाबी बन जाता है। ऐसी ही एक चाबी कोरिया जिले के किसान गोपाल सिंह के हाथों लग गई है। इस चाबी से उन्होंने खुद का सिंचाई का साधन न होने की समस्या रुपी ताले को खोल लिया है। मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी अधिनियम) से गोपाल के खेत में निर्मित डबरी ने उसे सब्जियों की खेती की कुंजी दे दी है जिसकी कमाई से परिवार की आमदनी लगातार बढ़ रही है। डबरी खुदाई के बाद उनके खेतों में हरियाली अब दूर से ही नजर आने लगी है। इस साल आई पहली बारिश से डबरी में जमा हुए पानी से गोपाल की सब्जियों की नई फसल बिकने को तैयार हो गई है। भिंडी और बरबट्टी की पैदावार के बाद अब जल्दी ही मनेन्द्रगढ़ के बाजारों में उनके उगाए मिर्च और बैगन भी नजर आएंगे।

मनरेगा से खेत में डबरी खुदाई के बाद कोरिया के मनेन्द्रगढ़ विकासखण्ड के डंगौरा में रहने वाले गोपाल अब अकुशल रोजगार की चिंता से मुक्त हो गए हैं। खुद का सिंचाई का साधन विकसित हो जाने से उनकी कई समस्याओं का एक साथ निदान हो गया है। पहले सिंचाई की सुविधा नहीं होने से वे अपने दो एकड़ खेतों के लिए पाइप लगाकर दूर नदी से पानी लाते थे। इसमें काफी समय और श्रम लगता था। असामाजिक तत्वों द्वारा कभी पाइप या तार काट देने से आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता था। डबरी बन जाने से इन परेशानियों से मुक्ति मिल गई है। अब गोपाल के खेतों में पर्याप्त हरियाली है। सब्जियां बेचकर वे परिवार की जरूरतों को आसानी से पूरा कर रहे हैं। इस साल अप्रैल-मई में लॉक-डाउन के दौरान उन्होंने हर सप्ताह तीन से चार हजार रूपए की सब्जी बेची। अब बारिश के मौसम की अग्रिम खेती से भी उन्हें हर सप्ताह दो से ढाई हजार रूपए का लाभ मिलना शुरू हो गया है।