भोपाल
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगूभाई छगनभाई पटेल को मध्य प्रदेश का नया राज्यपाल बनाया है। इनके पहले आनंदीबेन पटेल उत्तर प्रदेश के साथ मध्य प्रदेश के राज्यपाल पद पर थीं। मध्य प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर मंगूभाई छगनभाई पटेल ने कहा कि मैं राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह का आभारी हूं। नरेंद्र मोदी के हम पहले से साथी थे, उन्होंने हमें जो रास्ता दिखाया उस पर हम चलते रहें और समाज सेवा करते रहे और आगे भी चलते रहेंगे।
एमपी के 19वें राज्यपाल बने मंगू भाई पटेल गुजरात के नवसारी से पांच बार और एक बार दूसरे क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। मोदी कैबिनेट में वन एवं पर्यावरण मंत्री भी रहे हैं। वे दक्षिण गुजरात से प्रमुख आदिवासी नेता रहे हैं। गुजरात में भाजपा को मजबूत करने के लिए भी मंगूभाई पटेल को जाना जाता है। वे 2014 में गुजरात विधानसभा के कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। 2013 में उन्हें गुजरात विधानसभा का डिप्टी स्पीकर भी बनाया गया था। नवसारी जिले में उनकी गांडेवी विधानसभा सीट रही है। वहीं मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य और केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत को कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया है।
राज्यपाल की नियुक्ति से भाजपा ने साधा आदिवासी वोट बैंक
नए राज्यपाल मंगूभाई छगनभाई पटेल की नियुक्ति से भारतीय जनता पार्टी ने आदिवासी वोट बैंक को भी साधने का प्रयास किया है। संवैधानिक पद होने के नाते राज्यपाल का पार्टी की राजनीति में सीधा दखल नहीं रहता है, लेकिन जातिगत आधार पर एक बड़े वर्ग को यह संदेश जरूर दिया गया है कि उनके लोगों की पार्टी में बड़ी भूमिका है। इस माध्यम से वर्ष 2018 में भाजपा से रूठे आदिवासी वर्ग का विश्वास फिर से हासिल करने का मौका पार्टी को मिलेगा।
प्रदेश में आदिवासी वोट बैंक (अनुसूचित जनजाति) लंबे समय से भाजपा के साथ रहा और भाजपा के सत्ता में रहने का बड़ा कारण था। प्रदेश में इस वर्ग की विधानसभा की कुल 230 में से 47 सीटें हैं। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर भाजपा को 31 सीटों पर जीत मिली थी।
एक सीट पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी विजयी रहे थे। इस तरह कुल 32 सीटों पर पार्टी का कब्जा रहा और सरकार बनाई। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में यह वर्ग भाजपा से नाराज रहा और उसे दस सीटों का नुकसान हुआ। खासतौर पर मालवा-निमाड़ में काफी नुकसान हुआ। नतीजा यह रहा कि भाजपा बहुमत के आंकड़े से दूर रही और कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका मिला।
यह फायदे भी होंगे भाजपा को
भाजपा में लंबे समय से बड़े आदिवासी चेहरे की तलाश चल रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी चाहता था कि पार्टी में आदिवासी वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई सर्वमान्य नेता हो। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसी का तोड़ राज्यपाल की नियुक्ति के तौर पर निकाला गया है। मंगू भाई पटेल को राजनीति का लंबा अनुभव है और वे दक्षिण गुजरात से प्रमुख आदिवासी नेता रहे हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी करीबी हैं।
















