मंत्री सखलेचा ने किया अमृत महोत्सव कार्यक्रमों के पोस्टर का लोकार्पण

भोपाल

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने जीवन की आजादी के साथ ही स्वास्थ्य की आजादी को महत्वपूर्ण बताते हुए अध्ययनरत आयुर्वेद विद्यार्थियों और युवा वैद्यों से आयुर्वेद का गहन अध्ययन और रिसर्च करने से इस चिकित्सा पद्धति को जन-जन तक पहुँचाने का आव्हान किया। सखलेचा रविवार को मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के जगदीश चन्द्र बसु सभागार में आजादी के अमृत महोत्सव के वर्ष भर चलने वाले कार्यक्रमों पर केंद्रित पोस्टर का लोकर्पण करने के बाद आयुर्वेद वैद्यों की स्वतंत्रता में भूमिका विषय पर संगोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे।

मंत्री सखलेचा ने कहा कि दुनिया में विज्ञान की शुरूआत धर्म या अध्यात्म से हुई। प्राचीन काल से भारत में आयुर्वेद चिकित्सा का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। अंग्रेजों ने हमारी संस्कृति, व्यवसाय और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के विकास को क्षति पहुँचाई थी। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद औषधियों की विशेषता यह है कि इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।

मंत्री सखलेचा ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहली प्राथमिकता अपने यहाँ के लोगों का स्वास्थ्य है। बीते वर्षों में आयुर्वेद ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने अध्ययनरत विद्यार्थियों और युवा वैद्यों से आयुर्वेद का गहन अध्ययन और रिसर्च करने और इस चिकित्सा पद्धति को जन-जन तक पहुँचाने का आव्हान किया। सखलेचा ने बताया कि वर्तमान सरकारें आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार और जागरूकता को लेकर चिंतन कर रही हैं।

परिषद् के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि कोविड-19 के दौर में आयुर्वेद की बड़ी भूमिका रही है। परिषद् आयुर्वेद विज्ञान के अध्ययनकर्ताओं और वैद्यों को रिसर्च और डाक्यूमेंटेशन के क्षेत्र में सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन में समाज के हर वर्ग का योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी के दौर में और आजादी के बाद वैद्यों की भूमिका का विस्तार हुआ है। विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रवीण रामदास ने कहा कि भारतीय संस्कृति की जीवंतता का प्रतीक आयुर्वेद विज्ञान है। दुनिया में आयुर्वेद का सबसे अच्छा डाक्यूमेंटेशन भारत का है। आयुर्वेद समय की कसौटी पर परखा हुआ विज्ञान है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद विज्ञान और चिकित्सा पद्धति को आगे ले जाने के लिए अच्छे वैद्यों की आवश्यकता है।

पं.खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य एवं सीईओ डॉ. उमेश शुक्ला ने कहा कि अंग्रेजों की पराधीनता के दौर में आयुर्वेद विज्ञान का विकास प्रभावित हुआ। भोपाल में आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा देने में पूर्व राष्ट्रपति डॉ.शंकरदयाल शर्मा के पिताजी पं.खुशीलाल शर्मा का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि इस बार आयुर्वेद के बजट में बढ़ोतरी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार ने आयुर्वेद को मान्यता प्रदान की है। वरिष्ठ वैद्य गोपाल दास मेहता ने कहा कि इतिहास को भुला देने वाला समाज प्रगति नहीं कर सकता। हमें उन वैद्यों का स्मरण करना चाहिये, जिन्होंने आजादी के संघर्ष के दौरान समाज में योगदान किया है। नेशनल आयुर्वेद स्टुडेंट्स एंड यूथ एसोसिएशन (नस्या) के वैद्य प्रशांत तिवारी ने आरंभ में कार्यक्रम के उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी। परिषद् के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. आर.के.आर्य ने अमृत महोत्सव थीम पर केंद्रित पोस्टर और 200 कार्यक्रमों की जानकारी दी। कार्यकारी संचालक तस्नीम हबीब ने बताया कि केन्द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, ने सितंबर और अक्टूबर में राज्यों की परिषदों के साथ कार्यक्रम आयोजित करने की जिम्मेदारी परिषद को सौंपी है।

कार्यक्रम का आयोजन परिषद् नेशनल आयुर्वेद स्टुडेंट्स एंड यूथ एसोसिएशन (नस्या) और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।