बलराज साहनी नेशनल पुरस्कार से सम्मानित होना श्री अखिलेन्द्र मिश्र के लिये बहुत गर्व की बात है उन्होंने बताया की उन्हें अभिनय की तीनो विधा रंगमंच,टेलीविजन और भारतीय सिनेमा में उनके “आउटस्टैंडिंग कंट्रीब्यूशन ” के लिये आर्टिस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (AAI) के द्वारा उनके अभिनय के लिये उन्हें “बेस्ट एक्टर ” के रूप में श्री अनूप जलोटा जी के हाथो ट्राफी,शाल पुरुस्कार के रूप में दिया गया | आर्टिस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (AAI) जिसकी स्थापना वर्ष 1955 में की गयी थी जिसके आदरणीय बलराज साहनी जी फाउंडर थे इसमें श्री सुदर्शन गौर ,मदन पुरी ,अंबरीश पुरी,प्रेम चोपड़ा और कुछ अन्य लोग इसमें साथ जुड़े थे इसके पूर्व में वर्ष 1942 में भारतीय जन नाट्य संघ या इंडियन पीपल्स थियेटर असोसिएशन (इप्टा) की स्थापना हुई थी तब उसके भी फाउंडर बलराज साहनी थे श्री अखिलेन्द्र मिश्रा जी इप्टा मुंबई से कई वर्षो से जुड़े है जिससे बलराज जी भी जुड़े थे उस प्रकार से वे उन्हें अपने अभिनय के पितामह मानते है अखिलेन्द्र जी ने बताया की वे बलराज साहनी का अभिनय बहुत पसंद करते है उनकी अगर कोई कलाकार 5 फिल्में देख ले तो अभिनय की वर्कशाप पूरी हो जायेगी और उनकी चुनी हुई 10 फिल्मों को विस्तारपूर्वक देख ले तो अभिनय में जबरदस्त निखार आ सकता है इतने सशक्त अभिनय हुआ करते थे उनका आज भी भारतीय सिनेमा में बेदाग छवि और अभिनय की मिसाल गूंजती है उनके जैसे भारतीय सिनेमा में कोई चार या पाँच ही अभिनेता होंगे जो उनके समकक्ष रखे जा सकते है | उन्होंने कहा मैं बलराज जी की फिल्मे 10-10 बार तक देख कर बहुत कुछ सीखा हूँ | बलराज साहनी जी इप्टा में रंगमंच में कलाकार के रूप में जो नाटक को किया करते थे जिसके एम् एस सच्चू तब से अब तक डायरेक्टर है उस नाटक का नाम “आखरी शमा ” है जिसे वह स्वयं विगत 36 वर्षो से जिसमें उनकी यात्रा बैक स्टेज से ऑन स्टेज तक है उनका कहना है की आजकल के कलाकार अगर बैक स्टेज के महत्व को समझ जाये तो उनके लिए यह बहुत बड़ी बात हो सकती है | वैसे समय समय पर अखिलेन्द्र मिश्रा जी को कई सम्मान मिलते रहते है पर इस सम्मान का अर्थ उनके जीवन में बहुत बड़ा स्थान और महत्त्व रखता है यह विषय उनके लिए बहुत हर्ष और गर्व का है |
(दीपेंद्र दीवान को दिये गये क्लाउड के लिए इंटरव्यू के अंश )














