भोपाल :
मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में कठपुतली कला की विविध शैलियों पर एकाग्र ‘पुतुल समारोह’ के दूसरे दिन गुरुवार को रामलीला एवं प्रणाम काकोरी की प्रस्तुति दी गई। शाहजहांपुर के कप्तान सिंह ‘कर्णधार’ एवं साथियों ने दस्ताना और छड़ शैली में मनमोहक प्रस्तुति दी। जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् द्वारा मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में कठपुतली कला की विविध शैलियों पर एकाग्र पुतुल समारोह का आयोजन 20 से 24 अक्टूबर, 2021 तक किया जा रहा है। कठपुतली के माध्यम से ऐतिहासिक और पौराणिक चरितों एवं कथा-कहानियों को दिखाया जाता है।
वर्तमान समय में इस कला में समकालीन विषयों को भी आधार रूप में ग्रहण किया गया है जिससे युवा पीढ़ी को सदियों से चली आ रही इस विधा और इसके माध्यम से जीवन मूल्यों को संरक्षित करने की विधि को बताया जा सके। समारोह में प्रस्तुतियाँ प्रतिदिन सायं 6.30 बजे से हो रही है और दर्शको का प्रवेश निःशुल्क है। तीसरे दिन तीसरे दिन 22 अक्टूबर 2021 को छड़, मपेट और कंटम्प्रेरी शैली में सोने की चूड़ी और पिंजरे में शेर प्रस्तुति नई दिल्ली के अक्षय भाट एवं साथियों द्वारा दी जाएगी।
रामलीला में कथा की शुरूआत श्रीराम जन्म से हुई। इसके बाद लीला में ताड़का वध, सीता स्वयंवर, राम वनवास, सूपनखा की नाक काटने वाला दृश्य, सीताहरण, लंका में भगवान हनुमान और माता सीता का मिलना, लक्ष्मण शक्ति, श्रीरीम-रावण युद्ध जैसे प्रसंगों को कठपुतलियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। दूसरी प्रस्तुति प्रणाम काकोरी में रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह. चंद्रशेखर आजाद एवं अन्य क्रांतिकारियों द्वारा वर्ष 1925 में काकोरी रेल लूट और अंत में क्रांतिकारियों को दी गई फांसी के दृश्यों को मंचित किया गय़ा। दोनों ही प्रस्तुतियों के दौरान लगभग 40 कठपुतली का प्रयोग किया गया। प्रस्तुति में नैन सिंह, फैजान खान, फाजिल खान, सचिन कुमार, वरूण कुमार, कप्तान सिहं, चित्राली कर्णधार के साथ अन्य कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।















