पंजाब कांग्रेस में आप के 3 विधायक हुए शामिल 

चंडीगढ़
पंजाब कांग्रेस में इन दिनों जबरदस्‍त अंदरूनी कलह चल रही है। वहीं इसके सब के बीच मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पार्टी आलाकमान से मिलने के लिए दिल्ली रवाना होने से कुछ मिनट पहले आम आदमी पार्टी के तीन निलंबित विधायकों का कांग्रेस में स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप नेता सुखपाल सिंह खैरा, जगदेव सिंह कमलू और पीरमल सिंह धौला पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी द्वारा उनके प्रवेश को मंजूरी मिलने के बाद कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। सुखपाल सिंह खैरा, जो पंजाब में विपक्ष के नेता थे, दिसंबर 2015 में कांग्रेस छोड़ने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी में शामिल हुए थे। वह 2017 में आम आदमी पार्टी (आप) के टिकट पर भोलाथ से चुने गए थे। उन्होंने जनवरी 2019 में AAP छोड़ दी और अपनी खुद की पार्टी पंजाबी एकता पार्टी शुरू की।

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आज दिल्ली रवाना होने से पहले विधायक और पूर्व नेता प्रतिपक्ष सुखपाल खैरा और उनके दो आप विधायक सहयोगियों जगदेव सिंह कमलू, विधायक मौर और पीरमल सिंह धौला, विधायक भदौरा का पार्टी में स्वागत किया।" पंजाब कांग्रेस ने तीन नवागंतुकों के साथ खड़े श्री सिंह की एक तस्वीर के साथ ट्वीट किया। सिंह राज्य में अंदरूनी कलह को सुलझाने के लिए गठित तीन सदस्यीय कांग्रेस पैनल से मिलने के लिए दिल्ली में हैं। पार्टी के एक वर्ग ने तर्क दिया है कि वे श्री सिंह के नेतृत्व में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव नहीं जीत सकते। असहमति इतनी बढ़ गई कि श्रीमती गांधी को इस मुद्दे को देखने के लिए एक टीम बनानी पड़ी।

बता दें आगामी 2022 के विधानसभा चुनावों में विशेष रूप से पंजाब कांग्रेस नेतृत्व के भीतर से असंतोष की बढ़ती आवाजों के मद्देनजर किसी भी शर्मिंदगी से बचने के लिए पार्टी आलाकमान के सामने अपना दिल खोल दिया।पार्टी सूत्रों ने कहा है कि मुख्यमंत्री के खिलाफ शिकायतें अलग-अलग हैं, जिनमें सरकार में दलितों का कम प्रतिनिधित्व और उनकी मंडली के कारण मुख्यमंत्री की दुर्गमता शामिल है। 2015 में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और पुलिस फायरिंग से जुड़े मामलों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में सरकार की अक्षमता पर भी राज्य के नेता बेहद चिंतित हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि विधायक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जिस तरह पंजाब में भाजपा का सामना करना पड़ रहा है, वैसे ही उन्हें ग्रामीण मतदाताओं के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है।