कोलकाता
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के मंगलवार को मोदी सरकार के नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (NMP) प्रोग्राम पर गुस्सा जाहिर करने के एक दिन बाद अब बुधवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अपनी नाराजगी जताई हैं। राहुल गांधी ने जहां मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि नरेंद्र मोदी और भाजपा का एक नारा था कि '70 साल में कुछ नहीं हुआ' और 23 अगस्त को वित्त मंत्री ने जो भी 70 साल में इस देश की पूंजी बनी थी, उसे बेचने का फैसला ले लिया है। वहीं अब ममता बनर्जी ने भी मोदी सरकार और भाजपा को आड़े हाथ लिया हैं।
केंद्र सरकार की संपत्ति मुद्रीकरण योजना (नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन) पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि ये मोदी या बीजेपी की संपत्ति नहीं हैं। ये संपत्तियां देश की हैं। पीएम देश की संपत्ति नहीं बेच सकते। यह एक दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है और मैं इससे स्तब्ध हूं। इस फैसले की निंदा करने में मेरे साथ कई लोग शामिल होंगे।
देश की पूंजी बेचने का फैसला: राहुल गांधी
वहीं इससे पहले मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि जो देश में 70 सालों में अपनी पूंजी बनाई थी, उसको बेचने का फैसला मोदी सरकार ने किया है। मोदी सरकार अपने दो-तीन बड़े कारोबारी मित्रों का भला करना चाहती है। राहुल गांधी ने बताया कि राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन योजना से सिर्फ कुछ व्यवसाय बचे रहेंगे और रोजगार के अवसर पूरी तरह से कम हो जाएंगे। इतना ही नहीं राहुल ने कहा कि इस उद्देश्य केवल 2-3 निजी खिलाड़ियों की मदद करना है।
जानिए आखिर है क्या NMP?
आपको बता दें कि 23 अगस्त को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन लॉन्च किया थी, जिसके तहत सरकार का 6 लाख करोड़ रुपये जुटाने का प्लान है। इस एनएमपी योजना के तहत बिजली से लेकर सड़क और रेलवे क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर संपत्तियों को मोनेटाइज किया जाएगा। मंत्री के मुताबिक मोनेटाइजकी जाने वाले संपत्तियों का मालिकाना हक केंद्र सरकार के पास रहेगा और एक तय वक्त के बाद वापस सरकार को देना होगा। एनएमपी के तहत वित्तीय वर्ष 2022 से लेकर वित्तीय वर्ष 2025 तक की चार साल की अवधि होगी।














