दो मुख्यमंत्री टीका कार्ड मामला, जांच चल रही सुस्त गति से

जांजगीर
पिछले दिनों सक्ती के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कोविड 19 टीकाकरण अभियान के तहत टीका लगा चुके लोगों को जो टीकाकरण कार्ड का वितरण किया गया उसमें दो मुख्यमंत्री की तस्वीर प्रकाशित होने के मामले में जांच की जो धीमी गति चल रही है उससे जाहिर होता है कि विभाग नहीं चाहता कि इस मामले से जुड़े असल व्यक्ति का चेहरा सामने आये जिसे कि कटघरे में खड़ा किया जा सके।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व पहले सक्ती के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कोविड 19 टीकाकरण अभियान के तहत टीकाकरण कार्ड का वितरण किया गया था जिसमें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अलावा स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव की तस्वीर के नीचे भी मुख्यमंत्री प्रकाशित हुआ था जिसका कुछ लोगों को वितरित भी कर दिया गया था इस मामले पर कलेक्टर ने बीएमओ डॉ अनिल चौधरी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया था।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस उपूरे मामले में विभागीय स्तर पर जांच की जवाबदारी संयुक्त संचालक को सौंपी गई थी।और उन्होंने जो अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में इसके लिये दोष का पूरा ठिकरा संविदा पर कार्य कर रहे कर्मचारियों पर फोड़ा है। जांच रिपोर्ट में उन पहलुओं की ओर ध्यान नहीं दिया मसलन डिजाईन किसने तैयार की किसने इसके प्रकाशन का आदेश दिया,इसका प्रकाशन किस प्रिंटर ने किया यह भी जांच का विषय हैं बहरहाल ये जांच से अभी अछूते हैं। बताया जाता है कि इस कार्ड प्रमाण पत्र के प्रकाश का लिखित आदेश प्रिंटर को नहीं दिया गया था केवल मौखिक आदेश पर ही इसके प्रकाशन की पूरी जवाबदेही उसे सौंपी गई थी। जबकि किसी भी प्रकाश का आदेश लिखित में होता है और इसका अधिकार केवल बीएमओ के पास ही है। ऐसे में यह कर्मचारियों की त्रृटी ऐसा मानकर जांच का पटाक्षेप करना गलत है।

सूत्रों के हवाले से जानकारी हुई है कि विभागीय अफसरों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बीएमओ की अच्छी खासी पैठ है जिसके चलते अधिकारी भी गंभीरतापूर्वक जांच करने से कतरा रहे हैं। यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि यहां पदस्थ बीएमओ हमेशा से ही किसी न किसी विवाद से जुड़े रहे हैं लेकिन कभी उचित कार्रवाई नहीं हो पाई।