भोपाल
गर्मी के मौसम में बाघ और अन्य जंगली जानवर शहरी क्षेत्र में न आ जाएं इसलिए वन विभाग द्वारा तीन शिफ्टों में जंगल की गश्त की जाती है। लेकिन विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आधे से अधिक वन कर्मी सर्दी, जुकाम और बुखार से पीड़ित हैं, इस कारण उनकी जगह पर होमगार्डस् की सेवाएं ली जा सकती हैं। राजधानी के पास बाघों का मूवमेंट भले ही न हो लेकिन वन विभाग का गश्ती दल पूरे एरिया की बराबर वॉचिंग करता है।
केरवा और कलियासोत के जंगलों में वन विभाग ने गश्त के साथ साथ वाटर बाडीज पर भी चौकसी जरूरी है क्योंकि यहां पर शिकारियों का डेरा लगा रहता है। विभाग के उड़नदस्ते की विशेष टीम इन एरिया में आने वाले वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए तैनात है। उड़नदस्ते की नजर मोर और हिरण के शिकारियों पर भी है । जंगल में पानी की कमी होने के कारण वन्य प्राणियों का मूवमेंट कभी भी इस क्षेत्र में हो सकता है।
गर्मी के मौसम में अक्सर तेंदुए का मूवमेंट 13 शटर से जागरण लेकसिटी जाने वाले मार्ग और मेंडोरा के जंगल के बीच दिखता है, इसलिए इसको हॉट एरिया में शुमार किया गया है। इससे पहले बाघों का मूवमेंट तेज होने के कारण वन विभाग ने होम गार्ड की भी मदद ली थी। इस बार भी ऐसे ही आसार नजर आ रहे हैं। वैसे भी कोरोना काल में जंगल में जाने वाले सैलानियों की संख्या में कमी आई है। लेकिन जंगलों के वाटर होल सूखने से वन्य प्राणियों का मूवमेंट अब शहरी क्षेत्र में हो रहा है।













