भोपाल
केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के उस फैसले पर आपत्ति की है जिसमें डीएमएफ (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) की राशि को जिला स्तर से ट्रांसफर कर राज्य सरकार के खजाने में जमा करने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार द्वारा इसको लेकर जारी निर्देश में कहा गया है कि यह राशि सिर्फ जिला स्तर पर ही जिले के विकास के लिए खर्च की जा सकेगी। उधर राज्य सरकार केंद्र के इस आदेश के पहले इस फंड में जिलों में जमा कराई गई 3671 करोड़ से अधिक की राशि में से 697 करोड़ राज्य सरकार के खाते में जमा करा चुकी है। केंद्र के फैसले के बाद अब इस राशि की वापसी डीएमएफ में करनी होगी। प्रदेश में जिन जिलों में डीएमएफ की सर्वाधिक राशि जमा होती है, उसमें सिंगरौली, अनूपपुर, कटनी, बालाघाट, उमरिया समेत अन्य जिले शामिल हैं।
डीएमएफ की राशि का उपयोग जिलों में माइनिंग से आने वाली राशि से जिले का ही विकास करने के लिए केंद्र सरकार के खान मंत्रालय ने प्रावधान किया है। इस राशि को उपयोग के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन भी किया गया है जो जिले के विकास के लिए तय मापदंडों के आधार पर मंजूर करती है। इस राशि का उपयोग पिछले सालों में कुछ जिलों के कलेक्टरों ने शापिंग माल और अन्य कार्यों में करने की मंजूरी दी थी, तब भी केंद्र सरकार ने इस पर आपत्ति की थी और इसके बाद राज्य सरकार ने कलेक्टरों के फैसले बदलवाए थे। इस फंड के उपयोग के लिए सीधे तौर पर कहा गया है कि जहां माइंस हैं वहां के लोगों की शिक्षा, स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं के अलावा ऐसे लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए ही यह राशि खर्च की जा सकती है। इसके अलावा आधुनिकीकरण के नाम पर इस राशि के उपयोग पर रोक है।
केंद्र सरकार द्वारा यह आदेश जिन राज्यों को टारगेट कर लिखा गया है उनमें मध्यप्रदेश, झारखंड और गुजरात शामिल हैं। इन राज्यों ने जिलों को मिल रहे डीएमएफ फंड में से 5 करोड़ से अधिक की राशि की स्वीकृति के अधिकार मंत्रालय या राज्य स्तरीय मानिटरिंग कमेटी को दे दिए हैं। एमपी में पिछले दिनों यह मामला कैबिनेट में भी आया था।
केंद्रीय खनिज मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ. डी.वीना कुमारी ने 12 जुलाई को खनिज डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन एक्ट डी 1957 के उपसेक्शन 3 के सेक्शन-9 बी के हवाले से कहा है कि कुछ राज्यों में डीएमएफ की राशि का उपयोग प्रावधान से हटकर दूसरे कार्यों अथवा योजनाओं में किया जा रहा है। केंद्र के संज्ञान में आया है कि कुछ राज्यों में डीएमएफ के फंड को राजकोष या राज्य स्तरीय फण्ड जैसे मुख्यमंत्री राहत कोष में सीधे जमा किया जा रहा है। ऐसा करना केंद्रीय के कानून के विरुद्ध है। इसमें यह भी कहा गया है कि कलेक्टर अपने स्तर पर किसी दूसरे जिले या राज्य के विकास के नाम पर भी राशि ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे।















