नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केरल हाई कोर्ट के 2018 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर निर्णय के लिए उसे तीन जजों की पीठ के पास भेज दिया। केरल हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कर्मचारी पेंशन (संशोधन) योजना 2014 को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट ने कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में संशोधन को मनमाना करार दिया था। इस संशोधन के तहत अन्य बातों के अलावा पेंशन योग्य वेतन की सीमा 15,000 रुपये मासिक कर दी गई थी।
जज यूयू ललित और न्यायाधीश अजय रस्तोगी की पीठ ने कहा कि उसके समक्ष रखी गयी बातें 2016 में शीर्ष अदालत की दो जजों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले के तहत निर्धारित सिद्धांत के लागू होने से संबद्ध है और मामले की तह तक जाता है। ऐसे में तार्किक तरीका यह होगा कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की अर्जी सहित इन याचिकाओं को एक बड़ी पीठ के पास भेजा जाए।
शीर्ष अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह इन मामलों को मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन के समक्ष आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए रखे ताकि याचिकाओं को एक बड़ी पीठ के समक्ष रखा जा सके। पीठ ने अपने आदेश में कहा, ''दो जजों की पीठ में बैठकर उक्त दलीलों पर विचार करना हमारे लिए उचित नहीं होगा। तार्किक तरीका यह होगा कि इन सभी मामलों को कम से कम तीन जजों की पीठ को भेजा जाए ताकि उचित निर्णय पर पहुंचा जा सके।














