उत्तर प्रदेश में मोहर्रम के सर्कुलर पर हंगामा,सर्कुलर वापस लेने को कहा

  लखनऊ
            
मोहर्रम को लेकर उत्तर प्रदेश में एक सर्कुलर जारी हुआ है. इसमें यूपी में इस साल मोहर्रम पर जुलूस नहीं निकालने का निर्देश दिया गया है. गाइडलाइंस या सर्कुलर (Muharram 2021 Uttar Pradesh guidelines) सामने आने के बाद अब इनपर हंगामा शुरू हो गया है. शिया धर्मगुरु गाइडलाइंस में लिखी बातों पर आपत्ति जता रहे हैं. वहीं यूपी पुलिस का कहना है कि जारी सर्कुलर में कुछ विवादित या नया नहीं जोड़ा गया है.

बता दें कि शिया समुदाय मोहर्रम के 68 दिनों में शोक मनाता है. मोहर्रम की 10वीं तारीख को ताजिया निकाला जाता है. इसपर ताजिया 19 जुलाई को निकलना था, जिसपर पाबंदी लगा दी गई है.

यूपी में मोहर्रम की गाइडलाइंस पर विवाद क्यों
सबसे पहले समझिए विवाद की वजह क्या है. डीजीपी मुख्यालय की तरफ से जारी गाइडलाइंस के एक पाइंट पर मुख्य तौर पर शिया धर्मगुरुओं ने आपत्ति जताई है. गाइडलाइंस के चौथे पाइंट के एक हिस्से में लिखा है, 'पुराने लम्बित धार्मिक एवं साम्प्रदायिक प्रकरणों तथा ऐसे नये उठने वाले विवादों, अपरम्परागत धार्मिक जुलूसों एवं कार्यो, यौन संबंधी घटनाओं, गौवंश वय/परिवहन आदि घटनाओं को लेकर पूर्व में अनेक अवसरों पर सम्प्रदायिक सद्भाव प्रभावित होता रहा है. उक्त के दृष्टिगत विशेष सर्तकता अपेक्षित है.'
मुहर्रम सर्कुलर पर विवाद

गाइडलाइंस पर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद  ने आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि इसके लिए यूपी पुलिस को कोर्ट में लेकर जाना चाहिए. वह बोले, 'गाइडलाइंस शिया के ऊपर झूठे आरोपों का पुलिंदा है, लिखा है कि मोहर्रम में रेप होते हैं, गाय काटी जाती हैं. क्या यह सब कोविड गाइडलाइन हैं?'

मौलाना कल्बे जवाद ने आरोप लगाया कि ऐसा करके सिर्फ शिया-सुन्नी नहीं बल्कि हिंदू-मुस्लिम का भाईचारा खराब करने की कोशिश हुई है. वह बोले, 'यह गोलियों भरा खत है, जिसमें हमारे समुदाय को गाली दी गई है.' उन्होंने इस लेटर को वापस लेने की मांग भी की. जवाद ने कहा कि वे लोग खुद कोरोना की वजह से जुलूस नहीं निकालने वाले थे.

आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी और शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने भी इस सर्कुलर की निंदा की है. वह बोले कि ऐसी लगता है की यह किसी तालिबानी सोच वाले व्यक्ति ने लिखी है. उन्होंने इसे सऊदी और वहाबी सोच का नमूना तक कहा.

एडीजी ने कहा – सालों से यही सर्कुलर जारी हो रहा
गाइडलाइंस को लेकर उठे विवाद पर एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार ने फोन पर आज तक से कहा कि तीन-चार साल से यही सर्कुलर जारी हो रहा है. इसमें कोई भी बात नई नहीं लिखी गई है.

आगे कहा गया कि इंटेलिजेंस के इनपुट के आधार पर यह अपने अफसरों को सतर्कता बरतने के लिए जारी किया गया था. जो कि पुलिस विभाग का इंटरनल सर्कुलर है. किसी बाहरी व्यक्ति के लिए इससे कोई सरोकार नहीं है. प्रशांत कुमार ने कहा कि इसमें कुछ विवादित नहीं है और ना ही कोई नई बात जोड़ी गई है.