नई दिल्ली
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक समिति की बैठक बुधवार से चल रही है। आरबीआई आज अपनी मौद्रिक समीक्षा पेश करेगा। कोरोना महामारी के बीच आसमान छूती बेलगाम महंगाई और बेरोजगारी जैसे आर्थिक चुनौतियों से सामांजस्य बिठाकर मौद्रिक समीक्षा की घोषणा करना बड़ी चुनौती है। समिति के सामने मौजूदा समय में तीन अहम चुनौतियां हैं, जिनसे निपटकर उसके लिए लगातार सातवीं बार रेपो रेट में कमी करने का फैसला लेना मुश्किल हो सकता है।
आरबीआई मौद्रिक समिति के सामने सबसे पहली चुनौती है आसमान छूती महंगाई को काबू में करना। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बाद पिछले कुछ महीनों से खाद्य पदार्थों की कीमत में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। महंगाई बढ़ाने में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की अहम भूमिका रही है। डीजल महंगा होने से मालभाड़ा बढ़ा है, जो तमाम चीजों की कीमतों को बढ़ाने का काम किया है। इससे खुदरा जून की खुदरा महंगाई 6.26 पर पहुंच गई है। यह आरबीआई के लक्ष्य 4 फीसदी (+, – 2%) से अधिक है। आरबीआई को इसको जल्द से जल्द काबू करना सबसे बड़ी चुनौती होने वाली है। केंद्रीय बैंक ने चाल वित्त वर्ष में जीडीपी की विकास दर को 9.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। आरबीआई अपने अनुमान पर कायम रखने की कोशिश करेगा। हालांकि, अर्थव्यवस्था के कुछ संकेतक आरबीआई की चिंता को बढ़ा सकते हैं, जिनमें सर्विस पीएमआई सबसे ऊपर है। सर्विस सेक्टर का प्रदर्शन लगातार तीसरे महीने जुलाई में खराब रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई महीने का सर्विस सेक्टर के डेटा निराशाजनक रहे हैं। पिछले एक महीने के दौरान नए कारोबार और आउटपुट में गिरावट दिख रही है। डिमांड कम रहने और आगे इसमें कमजोरी की आशंका की वजह से सर्विसेज सेक्टर की कंपनियों ने नौकरियों में कटौती की है। आरबीआई को अर्थव्यवस्था की विकास रफ्तार तेज करना है तो सर्विस सेक्टर में तेजी लाना होगा। इसके लिए आरबीआई क्या कदम उठाता है इस पर सबकी नजर रहेगी।
चुनौती नंबर 3: बाजार में तरलता बढ़ाने के उपाय करना
वित्तीय विशेषज्ञों कहना है कि अगर अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज करना है तो आरबीआई को बाजार में मांग बढ़ना होगा। इसके लिए केंद्रीय बैंक को बाजार में तरलता बढ़ाने के उपाय करने होंगे। माना जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक कोविड19 संकट से त्रस्त अर्थव्यवस्था में वित्तीय संसाधनों का प्रवाह बढ़ाने के लिए सरकारी प्रतिभूति खरीद कार्यक्रम को फिर से शुरू कर सकता है। इसके साथ कोरोना महामारी से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष लोन की पेशकश कर सकता है।
उदार रूख रह सकता है बरकरार
आरबीआई मुद्रास्फीति को काबू में रखने के अपने प्रमुख लक्ष्य को खतरे में डाले बिना अपने उदार रुख को बनाए रख सकता है। इससे आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बनी रहेगी। महंगाई काबू में आने पर आरबीआई फिर से सस्ते कर्ज का तोहफा दे सकता है। मौजूदा समय में केंद्रीय बैंक का ध्यान मुद्रास्फीति के प्रबंधन के साथ ही आर्थिक वृद्धि को बल देने पर है।
नीतिगत दरों में बदलाव की संभावना नहीं
प्रमुख नीतिगत दरों को निर्धारित करने वाली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) शुक्रवार को मौद्रिक समीक्षा की घोषणा करेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई ब्याज दरों में कोई बदलाव न कर यथास्थिति का विकल्प चुन सकता है। गौरतलब है कि केंद्रीय बैंक ने लगातार छठी बार जून की नीति बैठक में प्रधान ब्याज दर को चार प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा था।















