अमेरिका में डेल्टा वेरिएंट का कहर, कई हिस्सों में 80 प्रतिशत मामले 

नई दिल्ली
कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देश अमेरिका में हालात फिर से बिगड़ने लगे हैं। जिसके पीछे की वजह वायरस के डेल्टा वेरिएंट को बताया जा रहा है। साथ ही आशंका जताई जा रही कि जल्द ही वहां पर मामले तेजी से बढ़ेंगे। कोरोना का ये वेरिएंट सबसे पहले भारत में पाया गया था। जिसे B.1.617.2 वेरिएंट भी कहा जाता है। बाद में वैज्ञानिकों ने आम जनता की समझ के लिए इसका नाम डेल्टा कर दिया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में मौजूदा संक्रमण के 51.7 प्रतिशत मामलों के लिए डेल्टा वेरिएंट ही जिम्मेदार हो सकता है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केन्द्रों (सीडीएस) की प्रवक्ता जूड फुल्स के मुताबिक 19 जून के पहले दो हफ्तों में लिए गए सैंपल में से 30 प्रतिशत डेल्टा वेरिएंट थे। वहीं 3 जुलाई के पहले 2 हफ्तों में ये आंकड़ा 52 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि अभी इसकी सटीक रिपोर्ट आनी बाकी है।

सीडीएस के मुताबिक अमेरिका के कई हिस्सों में डेल्टा वेरिएंट 80 प्रतिशत तक के मामलों के लिए जिम्मेदार है, जहां यूटा और कोलोराडो सहित पश्चिमी राज्यों में ये आंकड़ा 74.3 प्रतिशत और टेक्सास, लुइसियाना, अर्कांसस और ओक्लाहोमा जैसे दक्षिणी राज्यों में ये 58.8 प्रतिशत है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में वैक्सीनेशन रेट अच्छा है। साथ ही वहां की आबादी भी कम है। ऐसे में डेल्टा वेरिएंट का प्रभाव कम देखने को मिल रहा है। 

लोगों को कोरोना वायरस से बचाने के लिए निरंतर चल रहा कॉलोनियों को सैनिटाइज करने का काम वैज्ञानिकों के मुताबिक कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिएंट पहले के वेरिएंट की तुलना में ज्यादा खतरनाक है। यहां पर खतरनाक का मतलब ज्यादा संक्रामक से है। शुरुआत में जहां वायरस ने बुजुर्गों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया तो वहीं इस बार भारत में सबसे ज्यादा युवा इसकी चपेट में आए। वैसे भारत में कड़े प्रतिबंधों के बाद हालत तो सुधर गए, लेकिन अन्य देशों में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।