काबुल
अफगानिस्तान की सत्ता में तालिबान को हिस्सेदारी मिल सकती है। तालिबान से शांति वार्ता के दौरान अफगान सरकार के मध्यस्थों ने उसे यह प्रस्ताव दिया है। अफगान सरकार की ओर से हिंसा रोकने की एवज में सत्ता में भागीदारी का प्रस्ताव दिया गया है। कतर में तालिबान के साथ हुई मीटिंग के दौरान अफगानिस्तान की ओर से यह प्रस्ताव दिया गया। न्यूज एजेंसी एएफपी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। सूत्र ने कहा, 'हां, सरकार ने कतर को यह प्रस्ताव दिया है, जो तालिबान से वार्ता में मध्यस्थ के रोल में है। प्रस्ताव के तहत तालिबान को ऑफर दिया गया है कि यदि वह हिंसा रोकता है तो उसे सरकार में हिस्सेदारी दी जा सकती है।'
अमेरिकी सेनाओं की वापसी के बाद से ही तालिबान आक्रामक हो गया है और अब तक हिंसा के दम पर उसने अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में से 10 की राजधानियों पर कब्जा जमा लिया है। गुरुवार को तालिबान ने गजनी शहर पर कब्जा कर लिया, जो राजधानी काबुल से महज 150 किलोमीटर की ही दूरी पर स्थित है। इसके बाद से ही तालिबान के देश में कब्जा करने की आशंकाएं बढ़ गई थीं। गजनी को काबुल के गेटवे के तौर पर देखा जाता रहा है, उस पर तालिबान के कब्जे के बाद से ही अथॉरिटीज की चिंताएं बढ़ गई हैं। अफगान सरकार के प्रवक्ता ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा, 'दुश्मन ने शहर पर नियंत्रण कर लिया है।'
वार्ता के लिए अशरफ गनी की विदाई पर अड़ा तालिबान
तालिबान ने अफगानिस्तान के उत्तरी और पश्चिम हिस्से में कब्जा जमा लिया है। अब वह दक्षिण की ओर बढ़ रहा है। तालिबान को अफगानिस्तान सरकार की ओर से कई बार बातचीत का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उसने इससे इनकार कर दिया था। तालिबान का कहना था कि कोई भी बातचीत तभी की जा सकती है, जब राष्ट्रपति अशरफ गनी अपने पद से हट जाएं। इसी साल मई में वॉशिंगटन की ओर से अमेरिकी सेनाओं की वापसी का ऐलान किया गया था। इसके बाद से ही अफगानिस्तान में नाटकीय ढंग से हिंसा बढ़ गई थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- यह अफगानियों का संघर्ष है
अमेरिकी सेना के दबाव में बीते 20 सालों से अफगानिस्तान में स्थितियां नियंत्रण में थीं, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। यही नहीं बिना किसी प्लानिंग के अफगानिस्तान छोड़ने के फैसले को अमेरिका ने सही करार दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का कहना है कि यह अफगानियों की लड़ाई है और उन्हें ही पूरी मजबूती के साथ लड़ना होगा।













